खेरिया पुरोहित में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह, शुकदेव परीक्षित संवाद ध्रुव चरित्र और भक्त प्रहलाद की कथाओं का रसपान
डीग (नीरज जैन) गांव खेरिया पुरोहित में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को कथा वाचक संत राधे-राधे बाबू ने भक्तिमय वातावरण में कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि निर्मल मन से किया गया हरि स्मरण ही भगवान की शरण में पहुंचने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।
संत ने शुकदेव-परीक्षित संवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत में यह सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग है, जिसमें सात दिनों के भीतर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया गया है। ऋषि श्रृंगी के श्राप से मृत्यु का भय होने पर राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह छोड़कर शुकदेव मुनि की शरण ली और भगवत कथा का श्रवण कर आत्मकल्याण का मार्ग पाया।
ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव ने विष्णु भक्ति के बल पर कठोर तपस्या कर अटल पद प्राप्त किया। यह कथा सिखाती है कि सच्ची लगन और अटूट श्रद्धा से भगवान स्वयं भक्त की रक्षा करते हैं।
कथा में प्रह्लाद चरित्र का उल्लेख करते हुए संत ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने हरि नाम नहीं छोड़ा, उसे भगवान ने स्वयं प्रकट होकर संरक्षण दिया। कार्यक्रम में सरदार सिंह, राजेंद्र गौतम, ठाकुर दिनेश सिंह, रमसो जादौन, विनोद जादौन, अंकुर जादौन, हरनाम फौजी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।