जो शिक्षक टीईटी ( tet )पास नहीं, रिटायर हो या इस्तीफा दे- सुप्रीम कोर्ट

Feb 10, 2026 - 12:33
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जो शिक्षक टीईटी ( tet )पास नहीं, रिटायर हो या इस्तीफा दे- सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली (कमलेश जैन) सुप्रीम कोर्ट से शिक्षकों की नौकरी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मामला उन प्राइमरी शिक्षकों से जुड़ा है जिन्होंने अभी तक TET पास नहीं किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि नौकरी में बने रहने और प्रमोशन के लिए TET जरूरी है। इस फैसले का असर कई राज्यों के हजारों शिक्षकों पर पड़ सकता है। वहीं जिन शिक्षकों की सेवा के केवल कुछ साल बचे हैं, उन्हें लेकर भी कोर्ट ने अलग बात कही है, जिससे मामला और अहम हो गया है।
बिना TET नौकरी पर संकट
सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जो शिक्षक अब तक TET क्वालिफाई नहीं कर पाए हैं, उनके लिए नौकरी जारी रखना आसान नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की क्वालिटी और बच्चों की पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाने के लिए TET जरूरी शर्त है। ऐसे में जो शिक्षक कई साल से पढ़ा रहे हैं लेकिन परीक्षा पास नहीं कर पाए, उन्हें नियम के तहत फैसला लेना होगा। बता दें कि कोर्ट का यह रुख पहले भी साफ रहा है और अब इसे दोबारा मजबूत तरीके से लागू करने की बात कही गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।
इस्तीफा या रिटायरमेंट का विकल्प
कोर्ट ने कहा है कि जो शिक्षक तय समय में TET पास नहीं कर पाए हैं, उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या फिर रिटायरमेंट लेना पड़ सकता है। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवा केवल पांच साल या उससे कम बची है, उन्हें कुछ राहत दी गई है। वहीं बाकी शिक्षकों के लिए नियम पहले जैसे ही रहेंगे और उन्हें TET पास करना जरूरी होगा। फिलहाल यह फैसला उन मामलों पर ज्यादा लागू होगा जहां लंबे समय से बिना TET के शिक्षक सेवा में बने हुए हैं और प्रमोशन या स्थायी पद का लाभ ले रहे हैं।
प्रमोशन के लिए भी TET जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिर्फ नौकरी ही नहीं, बल्कि प्रमोशन के लिए भी TET पास होना जरूरी है। कई मामलों में देखा गया कि बिना TET के भी शिक्षकों को पदोन्नति मिल गई थी, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया। कोर्ट के अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी शिक्षकों का पात्र होना जरूरी है। वहीं राज्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि भर्ती और प्रमोशन में TET नियम का सख्ती से पालन किया जाए, जिससे भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा न हों और चयन प्रक्रिया साफ बनी रहे।
बड़ी बेंच के सामने रखे गए चार अहम मुद्दे
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण सवाल बड़ी बेंच के विचार के लिए भेजे हैं। ये सवाल शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) और अल्पसंख्यक संस्थानों से जुड़े अधिकारों पर सीधे असर डालते हैं।
अल्पसंख्यक संस्थानों पर अलग सुनवाई
कोर्ट ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों से जुड़े मामलों पर अभी अंतिम फैसला नहीं दिया गया है। इस मुद्दे पर बड़ी बेंच अलग से सुनवाई करेगी। बता दें कि पहले के फैसलों में अल्पसंख्यक स्कूलों को कुछ छूट दी गई थी, जिस पर अब फिर से सवाल उठे हैं। कोर्ट यह देखेगा कि क्या TET नियम इन संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए या नहीं। वहीं इस मामले में कई पुराने फैसलों और शिक्षा अधिकार कानून से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की जा रही है, जिससे आगे का रास्ता तय होगा।
आगे क्या होगा शिक्षकों के लिए
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्यों और शिक्षा विभागों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब सभी मामलों की जांच कर यह तय किया जाएगा कि कौन शिक्षक नियम के दायरे में आते हैं और किसे राहत मिल सकती है। वहीं जिन शिक्षकों ने अभी तक TET पास नहीं किया है, उनके सामने परीक्षा पास करने का ही मुख्य रास्ता बचा है।  आने वाले समय में इस फैसले को लेकर नए निर्देश भी जारी हो सकते हैं, जिससे भर्ती, प्रमोशन और सेवा शर्तों पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

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