यूपी बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से शुरू, नकल रोकने को लागू हुए सख्त नियम
आगरा / कमलेश जैन। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए नया अनुचित साधन निवारण अधिनियम 2024 लागू किया गया है। यह कानून नकल की परिभाषा को व्यापक बनाता है, जिसमें पेपर लीक, सर्वर छेड़छाड़ और सॉल्वर गिरोह जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। उल्लंघन पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना और जेल हो सकती है। इसका उद्देश्य पूरी परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है, जिसमें छात्रों को आत्मविश्वास से परीक्षा देने की अपील की गई है।
उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से आरंभ हो रही हैं। अब इसमें नकल की परिभाषा सिर्फ पर्ची या मोबाइल तक सीमित नहीं होगी।
नए अधिनियम में प्रश्नपत्र लीक या साझा करने, उत्तर पुस्तिका या ओएमआर में छेड़छाड़, अभ्यर्थी की जगह दूसरे को बैठाना, परीक्षा सर्वर, डिजिटल सिस्टम से छेड़छाड़, संगठित साल्वर गिरोह चलाना जैसी मामलों को गंभीर अपराध माना जाएगा।
नकल रोकने को 1998 के स्थान पर 2024 अधिनियम लागू
यह बदलाव इसलिए हो रहा है क्योंकि शासन और बोर्ड ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष की बोर्ड परीक्षा में 1998 के अनुचित साधन निवारण कानून के अंतर्गत कार्रवाई नहीं की जाएगी, बल्कि उससे अधिक सख्त उप्र सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 को लागू कर दिया है। इस कारण इस वर्ष परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त और तकनीकी निगरानी में रहेगी।
संगठित नकल, पेपर लीक के साथ उत्तरपुस्तिका में रुपये रखने पर भी होगी कड़ी कार्रवाई
नए अधिनियम में प्रश्नपत्र लीक करने से लेकर उत्तर पुस्तिका या ओएमआर शीट से छेड़छाड़, दूसरे को अभ्यर्थी बैठाना (साल्वर), परीक्षा सर्वर या डिजिटल माध्यम से गड़बड़ी करना और संगठित साल्वर गिरोह चलाने को भी गंभीर अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में एक करोड़ रुपये का जुर्माना, एक वर्ष तक की जेल के साथ लापरवाही करने वाले केंद्र को हमेशा के लिए डिबार करने जैसे सख्त प्रावधान शामिल हैं।