भागवत कथा के दूसरे दिन ध्रुव के चरित्र का वर्णन कर विष्णु की महिमा बताई; भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव होता है कल्याण- व्यास नृत्यगोपाल
गोविन्दगढ़ (अलवर) रामबास में श्री कलाधारी मंदिर पर आयोजित श्रीमदभागवत कथा के द्वितीय दिवस के अवसर पर श्रीमद भागवत कथा के कथा व्यास पं. नृत्यगोपाल शास्त्री ने ध्रुव चरित्र और सौनकादि ऋषियों के प्रश्न उत्तर की कथा का वर्णन किया।
पं. व्यास ने कहा कि नारद शिष्य ध्रुव ने अटल तपस्या से भगवान का मनमोह लिया। जिससे अपना और अपने परिवार का नाम अक्षय कर लिया।
भागवत महामात्मय का प्रसंग आगे बढा़ते हुए उन्होंने कहा कि भागवत ही भगवान है। भागवत भगवान का अक्षरावतार है। वक्ता श्रोता के धर्म को विवेचना करते हुए बताया कि वक्ता का चरित्र स्वच्छ होना चाहिए, वहीं श्रोता भगवान के प्रति समर्पित होना चाहिए। वक्ता प्रेरणा का पुंज होना चाहिए।उन्होंने कहा कि भगवान जीव का उद्धार करते हैं। द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में पांडवों के वंशवली का सुन्दर वर्णन किया।
व्यास ने अपने व्याख्यान में बताया कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा ही होगा मन, कथा को आगे बढ़ाते हुए युधिष्ठिर द्वारा प्रश्न प्रसंग का भी सुंदर वर्णन किया। 27 दिसंबर को सती चरित्र और भक्त प्रहलाद चरित्र का वर्णन किया जाएगा।
- भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव कल्याण करती है
भगवत कथा के समय जो भी आकर विराजमान हो जाता है, भागवत उसका सदैव कल्याण करती है। उन्होंने कहा कि बिना जाति और बिना मजहब देखे इनसे आप जो मांगे ये आपको वो मनवांछित फल देती है और अगर कोई कुछ न मांगे तो उसे मोक्ष परियन्त तक की यात्रा कराती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।