श्रीअन्न (मिलेट्स) पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन; मिलेट्स फसलों का उत्पादन बढाकर उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढाने की आवश्यकता- गृह राज्य मंत्री

Jan 15, 2026 - 14:43
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श्रीअन्न (मिलेट्स) पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन; मिलेट्स फसलों का उत्पादन बढाकर उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढाने की आवश्यकता- गृह राज्य मंत्री

भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहन करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजनान्तर्गत श्रीअन्न (मिलेट्स) पर राज्य स्तरीय एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन गुरूवार को बीडीए ऑडिटोरियम में किया गया। 
मुख्य अतिथि गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि मिलेट्स फसलों के क्षेत्रफल उत्पादन को बढाकर प्रसंस्कृत उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहुँच बढाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मिलेट्स का यदि हम उपयोग करते है तो मानव स्वास्थ्य सही रहता है एवं शरीर को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से प्राप्त हो जाते है। मिलेट्स फसलों में प्रोटीन, वसा, फाइबर, खनिज तत्वों की प्रचुर मात्रा होती है जो शरीर की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति कर देती है, जिससे शरीर स्वस्थ्य रहता है।
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा मिलेट्स को बढावा देने के लिए की गई पहल से किसानों, कृषि वैज्ञानिकों की सोच में भी परिवर्तन आया है। राज्य सरकार द्वारा भी परम्परागत व प्राकृतिक खेती के साथ मिलेट्स को बढावा देने के लिए अनुदान योजनाऐं चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मिलेट्स वर्षा आधारित फसलें है जिनमें उत्पादन लागत कम आती है एवं आसानी से कम देख रेख में उगाई जा सकती है। उन्हानें  भोजन में मिलेट्स फसलों को आवश्यक रूप से शामिल करने, किसानों से परम्परागत फसलों के साथ मिलेट्स फसलों की खेती करने का आह्वान किया गया।

इससे पूर्व गृह राज्यमंत्री बेढम ने मिलेट्स प्रदर्शनी का फीता काटकर कार्यशाला का शुभारम्भ किया तथा सभी स्टॉलस का भ्रमण कर मिलेट्स व उससे बने उत्पादों की जानकारी ली। विशिष्ठ अतिथि जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा, गिरधारी लाल गुप्ता, मोहन रारह, जगत गुर्जर उपस्थित रहे। 
अतिरिक्त निदेशक कृषि देशराज सिंह ने कहा कि मिलेट्स फसलों के प्रोत्साहन हेतु इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। श्रीअन्न (मिलेट्स) मोटे अनाज व छोटे दानों वाले अनाजों का एक समूह है, जोकि गेहूँ, चावल, जौ के मुकाबले अधिक पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्द्धक होते है। उन्होंने कहा कि मोटे अनाजों में प्रोटीन, विटामिन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, जिंक की भरपूर मात्रा होती है। ये ग्लूटेन मुक्त होते है एवं इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। उन्होंने बताया कि मोटे अनाजों में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड और ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। मोटे अनाज मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक होते है, भारत मोटे अनाजों का सबसे बडा उत्पादक देश है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में बाजरा, ज्वार, रागी, कुटकी, फिंगर मिलेट्स, कंगनी, कोंदो, सांवा आदि फसलों की खेती आसानी से की जा सकती है।
कार्यशाला में मिलेट्स विकास निदेशालय जयपुर के सहायक निदेशक डॉ. सुरेश यादव ने मिलेट्स पर भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कृषि कॉलेज भुसावर के डीन डॉ. उदयभान सिंह ने मिलेट्स फसलों के महत्व एवं उनकी मानव स्वास्थ्य पर उपयोगिता पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। कृषि कॉलेज रहीमपुर के डीन डॉ. अमर सिंह ने विभिन्न मिलेट्स फसलों की शस्य क्रियाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान नौगावां के डॉ. गोपाल लाल चौधरी ने राजस्थान में मिलेट्स फसलों के परिदृश्य में गत 70 वर्षो से क्षेत्रफल उत्पादन एवं उत्पादकता तथा वर्तमान में मिलेट्स फसलों पर अधिक अनुसंधान पर जोर दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र कुम्हेर की वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका जोशी ने श्रीअन्न फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की जानकारी देते हुए बताया कि श्रीअन्न फसलों का मूल्य संवर्धन कर विभिन्न उत्पाद जैसे-बिस्किट, चॉकलेट, लड्डू इत्यादि बनाकर कृषक अपनी आय बढा सकते है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा मिलेट्स प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर इच्छुक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। 

कार्यशाला में भरतपुर, अलवर, धौलपुर, करौली, डीग, सवाईमाधोपुर एवं दौसा के प्रगतिशील कृषक, मिलेट्स उद्यमी, विभिन्न मिलेट्स स्टार्टअप, कृषि वैज्ञानिक उपस्थित रहे। मिलेट्स उद्यमी/स्टार्टअप एवं खण्ड के कृषि विज्ञान केन्द्रों के द्वारा मिलेट्स के उत्पादों की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। कार्यशाला में  बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो, कुटकी, कांगनी, सावा सहित विभिन्न श्रीअन्न फसलों की उन्नत खेती तकनीकी, पोषण महत्व, प्रसंस्करण एवं मूल्य संर्वधन की जानकारी दी गई। संयुक्त निदेशक कृषि राधेश्याम मीणा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, वैज्ञानिकों, कृषकों का आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक उद्यान योगेश कुमार शर्मा, उप निदेशक कृषि डॉ. हब्बल सिंह, उप निदेशक उद्यान जनकराज मीणा, सहायक निदेशक कृषि राधारमण शर्मा, सहायक निदेशक कृषि चरन सिंह, कृषि अधिकारी रूपेन्द्र मीणा, धर्मेन्द तिवारी, डॉ.सुनील चौधरी सहित संभाग के कृषि अधिकारी उपस्थित रहे। मंच संचालन सहायक कृषि अधिकारी मनोज जैन द्वारा किया गया।

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