स्वतंत्रता का मंत्र-वन्देमातरम; वंदेमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर दीप प्रज्वलित कर आयोजन
सीकर (सुमेर सिंह राव) गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सामाजिक कार्यों में अग्रणीय संस्था सेवार्थ फाउंडेशन के सदस्यों द्वारा आयोजन किया गया जिस में राष्ट्रगीत वंदेमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सदस्यों द्वारा दीपो की रंगोली बनाई गई। जिस में दीप प्रज्वलित किए गए। संस्था सदस्य मीनू बिजारणिया ने बताया कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिमचंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में रचा। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक, क्रांतिकारियों का नारा और स्वदेशी आंदोलन का मंत्र बना। यह भारत को 'मां' के रूप में संबोधित कर जनमानस को एकता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय समर्पण की भावना से जोड़ता है। यह गीत औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जन चेतना फैलाने वाला सबसे प्रमुख नारा बन गया था। बंग-भंग विरोधी आंदोलन (1905) के दौरान यह घर-घर गूंज उठा था।इस गीत ने क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर जाति, धर्म और भाषा से परे पूरे भारत को एक साथ जोड़ा।अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम का उच्चारण करते हुए फांसी के फंदे को गले लगाया और जेल की यातनाएं सही।आज भी यह गीत नागरिकों में देशभक्ति, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रेरित करता है। इस आयोजन में सभी युवा सदस्यों ने दीपक जलाए सतीश मिटावा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे l

