परबतसर के किटिया गाँव में जाट समाज की ऐतिहासिक पहल: सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार, सादगी अपनाने का लिया संकल्प
परबतसर (मोहम्मद शहजाद)। समाज सुधार की दिशा में परबतसर क्षेत्र के गाँव किटिया ने एक मिसाल पेश की है। यहाँ के जाट समाज ने तेजाजी मंदिर प्रागण में देर रात एक विशाल बैठक आयोजित कर आपसी एकता और भाईचारे का परिचय देते हुए कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्णय लिए हैं। इन निर्णयों का मुख्य उद्देश्य विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में होने वाली फिजूलखर्ची को रोकना और समाज में सादगी लाना है। ग्रामवासी श्री राजेश जी गोदारा ने इस फैसले पर हर्ष व्यक्त करते हुए क्षेत्र के अन्य गाँवों को भी प्रेरणा लेने का संदेश दिया है। समाज द्वारा सर्वसम्मति से पारित किए गए नियम में मृत्यु भोज (मौसर) में केवल एक मिठाई (नुक्ती) और एक समय का सादा भोजन (सब्जी, दाल-पूरी) ही बनेगा। पेरावणी की रस्म दोनों तरफ से पूरी तरह बंद रहेगी।
बहन, बहनोई, फूफा और बुआ की अनावश्यक लंबी बैठकें बंद होंगी। मायरा में नकद राशि और बेस (पोशाक) के स्थान पर गांव वालों की तरफ से मात्र 400 रुपये देने का नियम बनाया गया है। परिवार के अलावा गाँव में अन्य जगहों पर बान (लावणा) बाँटना बंद रहेगा। उपहार के स्थान पर स्वेच्छा से नकद राशि दी जा सकती है। गाँव में महिलाएं एक-दूसरे के घर मिलने जाते समय 'बेस' (कपड़े) के लेन-देन से परहेज करेंगी। विवाह में डीजे केवल मंदिर की निकासी तक ही सीमित रहेगा। बारात, मायरा, जन्मदिन या अन्य किसी उत्सव में डीजे पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। विवाह के समय बहन-बेटी को बर्तन बांटने की रस्म बंद की गई है। अनावश्यक तड़क-भड़क वाली मेहंदी और हल्दी की रस्में बंद रहेंगी। विवाह या मौसर में गाँव के हर घर से एक व्यक्ति सेवा (जीमाना और पानी पिलाना) के लिए उपस्थित रहेगा। लग्न की रस्म पंडित और सवासणा के माध्यम से ही सम्पन्न कराई जाएगी।
विशेष रूप से डीजे को लेकर लिया गया निर्णय काफी चर्चा में है। ग्रामीणों का मानना है कि डीजे न केवल शोर प्रदूषण करता है बल्कि आर्थिक भार भी बढ़ाता है। मंदिर तक सीमित रखने से परंपरा भी बनी रहेगी और मर्यादा भी। किटिया गांव ने जो राह दिखाई है, वह पूरे परबतसर क्षेत्र के लिए एक उदाहरण है। अब देखना यह है कि क्षेत्र का अगला कौन सा गांव इस तरह की पहल कर समाज को नई दिशा प्रदान करता है।