108 कुंडीय विराट यज्ञ को 'पर्यावरण महायज्ञ' बनाने का आह्वान; प्रत्येक यजमान लगाएगा एक पौधा
उदयपुरवाटी (झुञ्झुनु/ सुमेरसिंह राव) झड़ाया धाम में आगामी 17 जून से आयोजित होने वाले ऐतिहासिक 108 कुंडीय विराट यज्ञ की तैयारियों को लेकर पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर सीताराम दास जी महाराज के पावन सानिध्य में एक विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मानवता के कल्याण और पर्यावरण शुद्धि के उद्देश्य से होने वाले इस महायज्ञ को एक व्यापक जन-जागरण और पर्यावरण संरक्षण अभियान का रूप दिया जाएगा।
धर्मसभा के मुख्य वक्ता एवं यज्ञ के संयोजक मदनलाल भावरिया ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय सनातन संस्कृति का मूल आधार है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना, आपसी सद्भाव और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को जागृत करना भी है। उन्होंने संपूर्ण क्षेत्रवासियों से इस भव्य आयोजन में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने की अपील की।
सभा के दौरान पर्यावरणविद् जुगल किशोर शर्मा ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव रखते हुए कहा, "यदि यज्ञ के 108 कुंडों पर बैठने वाले सभी 108 यजमान दंपति इस पावन स्मृति में कम से कम एक-एक पौधा लगाने और उसके पालन-पोषण का संकल्प लें, तो यह आयोजन सही मायनों में एक 'पर्यावरण महायज्ञ' साबित होगा। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में वृक्षारोपण ही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे सुरक्षित सुरक्षा कवच है।" इस दूरदर्शी प्रस्ताव का सभा में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने करतल ध्वनि से जोरदार स्वागत किया।
सभा में वक्ताओं ने विश्व पर्यावरण दिवस के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना हम सभी का सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक दायित्व है।
इस अवसर पर धर्मसभा को समाजसेवी जगदीश जाखड़, डॉ. रामावतार गजराज, डॉ. हीरा शंकर, यज्ञ उपाचार्य पंडित संजय शास्त्री तथा पंडित रविन्द्र शर्मा ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक सुर में इस बात पर बल दिया कि यह महायज्ञ धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना का एक अप्रतिम उदाहरण बनेगा।
सभा में हवन शाला निर्माण समिति के अध्यक्ष चौथमल जांगिड़, भगवान सहाय यादव, दिनेश कुमावत, सांवरमल समोता सहित भारी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण उपस्थित रहे। यज्ञ से जुड़े प्रारंभिक कार्यक्रम 16 जून से शुरू होंगे। सभा के समापन पर सभी ने पर्यावरण संरक्षण के इस पावन संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का दृढ़ निश्चय व्यक्त किया।


