वर्ल्ड दुरूद डे' पर परिंदों की सेवा का संकल्प: छतों पर रखें पानी के सकोरे - मौलाना शाहरुख़ रज़वी
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। 20 अप्रैल के विशेष अवसर पर, जिसे हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म दिवस के रूप में ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार याद किया जाता है, सुन्नी रज़ाकिया मस्जिद में 'वर्ल्ड दुरूद डे' अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। इस दौरान न केवल नबी की शान में दुरूद-ओ-सलात के नजराने पेश किए गए, बल्कि मानवता और जीव-जंतुओं की सेवा का संदेश भी दिया गया।
मस्जिद में आयोजित विशेष कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज फिरोज़ साहब ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से की। इसके पश्चात हाफिज अब्दुल रहमान साहब ने अपनी दिलकश आवाज में नात-ए-पाक पेश कर महफिल में मौजूद लोगों को इश्के मुस्तफा में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों और स्थानीय लोगों ने शिरकत की और सामूहिक रूप से दुरूद शरीफ का विर्द किया।
मस्जिद के इमाम, मौलाना शाहरुख़ रज़वी ने शिरकत कर रहे अकीदतमंदों को संबोधित करते हुए दुरूद शरीफ की फजीलत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा दुरूद शरीफ पढ़ने से न केवल दिल को सुकून मिलता है, बल्कि यह रसूले करीम की सच्ची मोहब्बत का जरिया भी है। हमारे नबी सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी कायनात और बेजुबान चरिंद-परिंद के लिए भी रहमत बनकर आए हैं।
बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौलाना रज़वी ने एक अहम पैगाम देते हुए कहा कि हर शख्स को चाहिए कि वह अपने घर की छतों, कारखानों और छायादार जगहों पर परिंदों के लिए पानी के कुंडों (सकोरों) का इंतजाम करे। बेजुबानों की प्यास बुझाना सुन्नते रसूल और बड़े सवाब का काम है।इस्लामी तालीमात और अनुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यक्रम के दौरान बच्चों को टोपी और बच्चियों को हिजाब भेंट किए गए।
महफिल के अंत में सलातो-सलाम पेश किया गया। विशिष्ट दुआ में मुल्क हिंदुस्तान में अमन, सुकून और भाईचारे की मजबूती के लिए इल्तिजा की गई। कार्यक्रम के समापन पर सभी मौजूद लोगों और बच्चों के बीच शीरनी बांटी गई। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया।


