कामां के लेवड़ा गांव में दर्दनाक हादसा; कच्ची रसोई ढहने से मलबे में दबकर दो मासूम भाई-बहन की मौत
डीग जिले के कामां थाना क्षेत्र के गांव लेवड़ा में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में घर के आंगन में खेल रहे मासूम भाई-बहन की कच्ची रसोई गिरने से मौत हो गई। घटना के समय परिवार के सदस्य पशुओं के लिए चारा तैयार करने गैतबाड़ा गए हुए थे। जानकारी के अनुसार लेवड़ा निवासी साहिल मेव के घर में ईंट-मिट्टी से बनी रसोई अचानक भरभराकर ढह गई। उस वक्त आंगन में खेल रहे 5 वर्षीय जनीस्ता और 4 वर्षीय रानिश मलबे में दब गए। परिजन और आसपास के लोगों ने दोनों को बाहर निकालकर कामां के उपजिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में रानिश को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर हालत में जनीस्ता को भरतपुर के आरबीएम अस्पताल रेफर किया गया। रास्ते में ही उसकी भी मौत हो गई।
सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग दर्ज किया और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिए। एएसआई रविंद्र सिंह ने बताया कि तहसीलदार रजनी यादव ने अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के लिए परिजनों को समझाया, लेकिन वे बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव घर ले गए।
- गैतबाड़े पर साथ ही गए थे दोनों भाई-बहन, तेज धूप के कारण घर भेज दिए... मृतक बच्चों के दादा अली मोहम्मद मेव ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे पूरा परिवार घर से करीब 500 मीटर दूर गैतबाड़े में पशुओं के लिए चारा (बुर्जी) बनाने गया हुआ था।
परिवार में पुत्र साहिल, पुत्रवधू अरफीना, पोता रानिश, पौती जनीस्ता और डेढ़ वर्षीय पौती अनाया भी साथ थी। तेज धूप पड़ने के कारण 5 वर्षीय जनीस्ता और 4 वर्षीय रानिश को घर भेज दिया गया कि वहां जाकर खेलें। दोनों भाई-बहन घर चले गए, लेकिन करीब आधे घंटे बाद गांव में हो-हल्ला सुनाई दिया। परिजन घर पहुंचे तो देखा कि रसोईघर गिर चुका था और दोनों बच्चे मलबे में दबे थे।
कामां के गांव लेवड़ा में साहिल मेव के घर के आंगन में बनी रसोई केवल ईंट-मिट्टी की चिनाई से तैयार की गई थी। ऊपर छाया के लिए सीमेंट की चादर डाल रखी थी, लेकिन रसोईघर की नींव की ठीक से खुदाई कर निर्माण नहीं किया गया था। कमजोर दीवारों होने से ढांचा भरभराकर गिर गया और दोनों मासूम उसकी चपेट में आ गए। मेवात क्षेत्र के कई गांवों में आज भी बिना मजबूत नींव के मकान निर्माण का चलन है। विशेषज्ञों के अनुसार इसी वजह से समय-समय पर इस तरह के हादसे सामने आते रहते हैं, जहां मामूली मौसम के असर से दीवारें गिर जाती हैं।
- हर किसी की आंखें हुई नम... घटना के बाद जिसने भी यह खबर सुनी सभी की आंखें नम हो गईं। वहीं तहसीलदार की समझाइश के बाद भी परिजनों ने बच्चों का पोस्टमार्टम नहीं कराया।


