जैन साधु-साध्वियों की सुरक्षा को लेकर उठी राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) सकल जैन समाज ने सोमवार को जैन साधु-साध्वियों की सुरक्षा की मांग को लेकर समाजजनों ने प्रधानमंत्री तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम पत्र प्रेषित कर ज्ञापन में जैन संतों के विहार के दौरान स्थायी सुरक्षा नीति बनाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि जैन समाज की दो साध्वियों का हाल ही में सड़क दुर्घटना में मध्य प्रदेश के रीवा मेंअसामयिक समाधिमरण हो गया था। इस घटना ने जैन समाज के नागरिकों को गहरे शोक में डाल दिया है।
सकल जैन समाज अध्यक्ष सुमेर चंद जैन ने बताया कि ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि जैन श्रमण-श्रमणी परंपरा में पैदल विहार केवल परंपरा नहीं, बल्कि धार्मिक जीवन का अनिवार्य अंग है। जैन साधु-साध्वियां जीवनभर नंगे पांव, बिना किसी वाहन के, धर्म प्रचार और आत्मकल्याण के उद्देश्य से देशभर में भ्रमण करते हैं, लेकिन बढ़ते यातायात, लापरवाही तेज रफ्तार वाहनों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के अभाव ने उनके विहार को अत्यंत जोखिमपूर्ण बना दिया है। अध्यक्ष जैन ने कहा कि अब समय आ गया है कि जब केंद्र सरकार को जैन साधु-साध्वियों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि देशभर में जैन संतों के पैदल विहार के लिए एक स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया जाए। इस प्रोटोकॉल में हाईवे पेट्रोलिंग, पायलट वाहन की व्यवस्था और विहार मार्ग की पूर्व सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे प्रावधान शामिल किए जाएं। समाज ने यह भी मांग उठाई कि प्रमुख जैन तीर्थ क्षेत्रों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर संत विहार कॉरिडोर विकसित किए जाएं।
उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग:
नवयुवक मंडलअध्यक्ष धीरज जैन ने बताया कि जैन समाज ने दोनों आर्यिकाओं की दुर्घटना की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि यह घटना केवल जैन समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर आघात है, इसलिए सरकार को इसे राष्ट्रीय क्षति मानते हुए आधिकारिक शोक संवेदना भी व्यक्त करनी चाहिए। जैन समाज ने इस दुखद घटना के बाद आगामी 12 दिनों तक सभी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम सादगी से आयोजित करने का निर्णय लिया है। समाज ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पर दोषारोपण करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।


