प्रदेश में कभी भी लागू हो सकती पंचायत, शहरी निकाय चुनाव की आचार संहिता
जयपुर (कमलेश जैन) स्थानीय निकायों और पंचायतों के आगामी चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी। चुनाव आयोग और जिला प्रशासन ने निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए कमर कस ली है। आचार संहिता लागू होते ही क्षेत्र में नए विकास कार्यों, घोषणाओं और अधिकारियों के तबादलों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।
- नए कामों पर ब्रेक, पुराने रहेंगे जारी
आचार संहिता के प्रभावी होते ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्र और जिले में किसी भी नए विकास कार्य को स्वीकृति नहीं मिल सकेगी। नए उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि जो विकास कार्य आचार संहिता लागू होने से पहले ही शुरू हो चुके हैं, वे बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेंगे। प्रशासन ने साफ किया है कि नई योजनाएं और नए कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रतिबंधित रहेंगे।
- नई स्कीम, नए विकास कार्य एवं नए कार्यादेश आचार संहिता के लागू होने के बाद पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगे।चुनाव के लिए बड़ी मात्रा में कार्मिकों/अधिकारियों की आवश्यकता होगी,
- ऐसे में पंचायतीराज और शहरी निकाय से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर भी रोक लगेगी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद इन जिलों से किसी कार्मिक को पद से कार्यमुक्त होने की अनुमति नहीं होगी, भले ही उसका स्थानान्तरण चुनाव कार्यक्रम से पूर्व का ही क्यों न हो?,
- मंत्री निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव समाप्ति तक राजकीय दौरे पर नहीं जाएंगे, कानून व्यवस्था बिगड़ने या आपात स्थिति में मंत्री की उपस्थिति जरूरी है। तो यह रोक लागू नहीं रहेगी। लेकिन इसकी सूचना संबंधित विभाग के सचिव राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेंगे,
- मंत्री संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में दौरे पर रहे तो सरकारी वाहन का उपयोग नहीं करेंगे, यदि निजी वाहन का वे उपयोग करते हैं तो सायरन आदि का उपयोग नहीं करेंगे, निर्वाचन क्षेत्र में दौरे पर रहने पर चुनाव से जुड़े अधिकारियों को नहीं बुलाएंगे मंत्री, मंत्री संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में रहे तो वहां स्थित विश्राम गृहों का उपयोग कार्यालय रूप में नहीं करेंगे,
- डाक बंगले या सरकारी आवास या उससे जुड़े परिसरों का उपयोग भी वे कार्यालय रूप में नहीं करेंगे, वे यहां चुनाव से जुड़ी कोई बैठकभी नहीं कर पाएंगे, सरकारी विश्राम गृहों, डाक बंगलों का होगा निष्पक्ष उपयोग सुनिश्चित, सरकारी आवास को भी निष्पक्ष तरीके से अन्य दलों के अभ्यर्थियों को उपयोग की दी जाएगी अनुमति, लेकिन वे भी उनका उपयोग चुनाव से जुड़े कार्य में नहीं कर सकेंगे, निर्वाचन से जुड़े सरकारी अधिकारी मंत्री के दौरे के समय उनके स्वागत में या प्रोटोकॉल में नहीं जाएंगे।


