धतुरिया में श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन; संत प्रभु जी नागर: 'जीवन रूपी नाव नहीं, भाव पलटाना
अंता (सफीक मंसूरी) धतुरिया में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे सोपान में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर मालवा के गौ सेवक संत पं. प्रभु जी नागर ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्त को भगवान से यही प्रार्थना करनी चाहिए कि हे नाथ, जीवन रूपी नाव को मत पलटाना, तू बस हमारे भाव को पलटा देना। उन्होंने अच्छे कर्म करते हुए भक्ति की धारा से जुड़े रहने का संदेश दिया।
श्रद्धालुओं से खचाखच भरे विशाल पंडाल में संत नागर ने आगे कहा कि हमारी कंचन काया की तिजोरी भगवान के नाम से ही भरती है। उन्होंने मीरा बाई का उदाहरण देते हुए कहा कि 'राम रतन धन पायो' के निरंतर जप से मीरा बाई सब कुछ भूल गई थीं। भक्ति के बल से प्राप्त इस धन को कोई चोर या यमदूत भी नहीं छीन सकता। उन्होंने बताया कि जीवन के अंत में केवल पंच तत्वों का शरीर ही शेष रहता है और सारे रिश्ते खत्म हो जाते हैं, इसलिए निरंतर जप करने के लिए भागवत भक्ति से अवश्य जुड़ना चाहिए।
पं. प्रभु जी नागर ने पारिवारिक जीवन पर भी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के मुखिया को सट्टे की जीत और बेटे की जिद कभी पूरी नहीं करनी चाहिए। जीवन में धर्म और संस्कृति की राह पर चलते हुए सदकार्य करते रहना चाहिए। बच्चों में अच्छी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी आवश्यक हैं। उन्होंने जोर दिया कि यदि किशोर उम्र में उनकी संगत अच्छी होगी, तो वे मदिरा की जगह मंदिर की ओर कदम बढ़ाएंगे। भक्ति का उद्भव हमारी संगत से ही होता है।
संत नागर ने मोक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन के अंत में भगवान का नाम और भगवान का भरोसा ही बचना चाहिए, यही मोक्ष है। उन्होंने भगवान पर कभी संशय न रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गुरु और गोविंद दोनों में से जिसने आपको जीते-जी निभाया है, वह अंत समय में भी निभाएगा। भक्त के काम के लिए भगवान अपने नियम बदल देते हैं। हमारे ऋषि-मुनि भी मानते हैं कि भक्तों के प्रबल प्रेम के पाले पड़कर प्रभु को भी नियम बदलते देखा गया है।
एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए पं. नागर ने कहा कि जिस तरह भोज में छोटी-मोटी नुक्ती एक-दूसरे से मिलकर हजारों लोगों का भंडारा पूरा कर देती है, क्योंकि उसे सब तक पहुंचने के लिए ही बनाया गया था। फिर जो नुक्ती बच जाए, उसे घर-घर बांट देना चाहिए, यही ईमानदारी है। उन्होंने गांव में जब भी कोई अच्छा काम करने के लिए समिति बनाई जाए, तो उसमें ईमानदारी से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि झगड़ा करने से आगे कोई साथ नहीं देगा।


