अलावड़ा में फॉलोअप शिविर: अफसर तो आए पर फरियादी नहीं, सूचना के अभाव में खाली कुर्सियों से 'बतियाता' रहा प्रशासन
22 विभागों का अमला समय पर पहुंचा, प्रचार न होने से नहीं आए फरियादी; बारिश का बहाना बना 3 बजे ही खिसके कर्मचारी
अलवर/रामगढ़ (राधेश्याम गेरा) राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने के उद्देश्य से शुरू किए गए 'जनता के द्वार' अभियानों की जमीनी हकीकत अलावड़ा में खुलकर सामने आई। सोमवार को ग्राम पंचायत अलावड़ा के भवन में आयोजित 'फॉलोअप शिविर' में अफसर तो भारी-भरकम लश्कर के साथ पहुंचे, लेकिन सूचना के अभाव में फरियादी ही नदारद रहे। नतीजा यह हुआ कि दिनभर 22 विभागों के कर्मचारी खाली कुर्सियों को निहारते और मोबाइल पर वक्त काटते नजर आए।
- न फरियाद, न सुनवाई: ई-मित्र पर ही दिखा थोड़ा काम
शिविर सुबह 10 बजे शुरू हुआ। एसडीएम सुभाष यादव व तहसीलदार आशीष कुमार शर्मा सहित करीब दो दर्जन विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर मुस्तैद थे। लेकिन ग्रामीणों को शिविर की पूर्व जानकारी ही नहीं थी।
दिनभर में केवल ई-मित्र कियोस्क पर ही कुछ लोग फोटोकॉपी या दस्तावेजों की नकल निकलवाते दिखे। किसी भी विभाग के टेबल पर अपनी शिकायत या समस्या लेकर कोई ग्रामीण नहीं पहुंचा।
- बारिश और अव्यवस्था के बीच 3 बजे ही सिमट गया शिविर
एक तरफ फरियादियों का अकाल और दूसरी तरफ रुक-रुक कर हो रही रिमझिम बारिश। पंचायत भवन में जगह की कमी और बैठने की माकूल व्यवस्था न होने के कारण दोपहर 3 बजते-बजते कर्मचारियों ने बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर दिया। निर्धारित समय से पहले ही शिविर स्थल पर सन्नाटा पसर गया।
शिविर में प्रशासनिक स्तर पर तहसीलदार आशीष कुमार शर्मा, अतिरिक्त विकास अधिकारी अखिलेश गुप्ता, प्रशासक जुम्मा खान, एसीबीईओ रमेश गांधी, जेवीवीएनएल के सहायक अभियंता योगी, आईएलआर पदमसिंह, पटवारी गंगाचरण सिंह व सोनू मीणा, वीडीओ रवि शर्मा, नरेगा सहायक मुल्खराज, कृषि पर्यवेक्षक महेंद्र यादव, सहकारी समिति सचिव हितेश गेरा, वैद्य ओमप्रकाश, उपवैद्य अतुल सैनी, सीएचसी स्टाफ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा वन व जलदाय विभाग का अमला मौजूद रहा।
सवालिया निशान: लाखों रुपये खर्च कर आयोजित किए जाने वाले इन शिविरों का प्रचार-प्रसार अगर धरातल पर नहीं होगा, तो आमजन को इसका लाभ कैसे मिलेगा? प्रशासन की इस लापरवाही से सरकार की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।

