प्राकृतिक खेती से स्वस्थ समाज और समृद्ध किसान का निर्माण संभव -जायसवाल

Jun 16, 2026 - 20:20
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प्राकृतिक खेती से स्वस्थ समाज और समृद्ध किसान का निर्माण संभव -जायसवाल

रामगढ़ (राधेश्याम गेरा) उपखण्ड क्षेत्र के कृषि विज्ञान केन्द्र नोगावां में मुख्य अतिथि डॉ. संजय जायसवाल, सांसद, पश्चिम चंपारण (बिहार) की मौजूदगी में प्राकृतिक खेती पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन व प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशाला, सह  प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। 
कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, उसके लाभों एवं व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संजय जायसवाल सांसद पश्चिम चंपारण (बिहार) तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह ने की। इस दौरान विशिष्ट अतिथियों के रूप में अशोक गुप्ता जिलाध्यक्ष, नारायण मीणा प्रदेश अध्यक्ष,  नरेश गोयल जिला संयोजक एवं जिला महामंत्री, रानू पाराशर प्रदेश प्रवक्ता, कमल भादवा, इन्द्रजीत सिंह पूर्व जिलाध्यक्ष तथा सरिता राज पार्षद उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, कृषि कॉलेज, अनुसंधान केंद्र एवं कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित सैकड़ो कृषक व सैकडो़ं कृषक महिलायें एवं विधीयर्थी उपस्थित रहे ।   
मुख्य अतिथि डॉ. संजय जायसवाल सांसद, पश्चिम चंपारण (बिहार) ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान युग की आवश्यकता है। इससे किसानों की उत्पादन लागत कम होती है, भूमि की उर्वरता बनी रहती है तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं तथा इसके सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर चुके हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाकर इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की व्यवस्था के.एल. मीणा उप निदेशक उद्यान विभाग अलवर एवं प्रदर्शनी और कृषि विज्ञान केंद्र के प्रदर्शन इकाइयों – केंचुआ पालन , गिर गाय इकाई, बकरी पालन इकाई आदि का भ्रमण डॉ. सुभाष चंद्र यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र नोगावां (अलवर-1) द्वारा की गई।  मंच संचालन मनोज जैन, कृषि अधिकारी अलवर ने किया।
कार्यशाला के दौरान डॉ. पूनम प्रजापति ने कृषकों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न अवयवों की प्रायोगिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत तथा अन्य पौध संरक्षण के प्राकृतिक घोलों एवं विधियों को तैयार करने की विस्तृत प्रक्रिया का प्रदर्शन करते हुए उनके उपयोग, मात्रा एवं लाभों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती की इन तकनीकों को अपनाकर किसान रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम कर सकते हैं तथा कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर डॉ. जी.एल. चौधरी, क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान केन्द्र, अलवर ने कृषकों को बाजरा एवं मूंग की उन्नत खेती के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने उन्नत किस्मों के चयन, बीज उपचार, संतुलित पोषण प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा बेहतर उत्पादन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की तथा किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
वक्ताओं ने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं किसानों की आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बताते हुए अधिक से अधिक किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने पर बल दिया। कार्यक्रम में अथितियों ने कृषि विज्ञान केंद्र पर पौधा रोपण कर पर्यावरण हरा भरा रखने और प्राकृतिक जीवन जीने का संदेश दिया । कार्यशाला का समापन प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाने एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ किया गया।

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