श्रुत पंचमी पर्व मुनि ज्ञान भूषण जी के सानिध्य में मनाया

Jun 19, 2026 - 22:04
 0
श्रुत पंचमी पर्व मुनि ज्ञान भूषण जी के सानिध्य में मनाया

लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) कमलेश जैन 

श्रुत पंचमी जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र ऐतिहासिक पर्वों में से एक है। जैन धर्म में श्रुत पंचमी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन मनाई जाने वाली श्रुत पंचमी को ज्ञान, अध्ययन और धर्मग्रंथों की पूजा का महापर्व आचार्य मुनि ज्ञान भूषण जी के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने शास्त्र भेंट कर जैन मंदिर के संत भवन में मनाया।  जैन समाज के लोगो ने शास्त्रों की आराधना की और ज्ञान के महत्व को स्मरण किया।
आचार्य श्री नेश्रुत पंचमी के महत्व को श्रद्धालुओं को अपने उद्बोधन में बताया कि 'श्रुत' का अर्थ होता है 'सुना हुआ ज्ञान' भगवान महावीर के मोक्ष जाने के बाद कई सौ सालों तक जैन धर्म का सर्वोच्च ज्ञान लिपिबद्ध (लिखा हुआ) नहीं था। आचार्य और मुनि इस ज्ञान को सुनकर, याद रखकर (मौखिक रूप से) एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाते थे।
 लेकिन समय के साथ, मुनियों की याद रखने की क्षमता अथवा स्मरण शक्ति कम होने लगी। तब दिगंबर जैन परंपरा के महान संत आचार्य धरसेन को यह चिंता सताने लगी कि अगर इस ज्ञान को लिखा नहीं गया, तो यह हमेशा के लिए लुप्त हो जाएगा।
 आचार्य धरसेन की प्रेरणा से उनके दो योग्य शिष्यों- आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबलि ने ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन जैन धर्म के सबसे पहले और महान ग्रंथ 'षट्खंडागम' की रचना पूरी की थी।
 
पहला लिखित शास्त्र: आज ही के दिन जैन धर्म को जैन संस्कृति को उसका पहला लिखित शास्त्र मिला था। जब यह ग्रंथ पूरा हुआ, तो देवों और मुनियों ने मिलकर ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन इस पवित्र ग्रंथ की महापूजा की, तभी से हर साल इस दिन को 'श्रुत पंचमी' के रूप में मनाया जाता है। कस्बे के दिगंबर जैन मंदिर में बहुत ही भक्तिभाव से 'श्रुत' यानी शास्त्रों की पूजा मुनि श्री के सानिध्य में की गई। 
 पंचमी पर्व पर मुनि श्री को शास्त्र भेंट के पुणर्जक नीलकमल वंदना जैन अशोक कुमार जैन ग्वालियर, प्रदुमन कुमार मैना जैन मुकेश रेखा रावका कमलेश कुमार धीरज कुमार, महेश चंद्र मनीष जैन कामा, मंजू मनोज जैन इंदिरा प्रमोद लक्ष्मणगढ़, पाद प्रक्षालन का लाभ प्रकाश चंद्र नरेंद्र कुमार सीकरी द्वारा लिया गया।
 मुनि श्री ने अपने प्रवचनों के दौरान कहा कि श्रुत पंचमी केवल एक पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि हमारे संतों ने कितनी कठिनाई से ज्ञान को संजोकर हम तक पहुंचाया है। यह पर्व जैन समाज को संदेश देता है कि: हमें शास्त्रों का आदर करना चाहिए (उन्हें कभी जमीन पर या गंदे हाथों से नहीं छूना चाहिए)। ज्ञान को केवल तिजोरी या अलमारी में बंद नहीं रखना चाहिए, बल्कि रोज उसे पढ़कर अपने जीवन में उतारना चाहिए।

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क बुलंद आवाज के साथ निष्पक्ष व निर्भीक खबरे... आपको न्याय दिलाने के लिए आपकी आवाज बनेगी कलम की धार... आप भी अपने आस-पास घटित कोई भी सामाजिक घटना, राजनीतिक खबर हमे हमारी ई मेल आईडी GEXPRESSNEWS54@GMAIL.COM या वाट्सएप न 8094612000 पर भेज सकते है हम हर सम्भव प्रयास करेंगे आपकी खबर हमारे न्यूज पोर्टल पर साझा करें। हमारे चैनल GEXPRESSNEWS से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद................