उदयपुर नगर निगम घोटाला: SOG ने पूर्व अधिकारी को पकड़ा, 272 फर्जी पट्टों के मामले में कई बड़े नामों का हो सकता है पर्दाफाश

Aug 4, 2026 - 22:02
Aug 5, 2026 - 12:49
 0
उदयपुर नगर निगम घोटाला: SOG ने पूर्व अधिकारी को पकड़ा, 272 फर्जी पट्टों के मामले में कई बड़े नामों का हो सकता है पर्दाफाश

उदयपुर (राजस्थान) 

उदयपुर के चर्चित 272 भूखंड (प्लॉट) घोटाले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उदयपुर की पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया को हिरासत में लिया है। SOG की टीम ने आरोपी महिला अधिकारी को जोधपुर स्थित उनके आवास से पकड़ा और पूछताछ के लिए उदयपुर लेकर आई है।

कार्रवाई के दौरान SOG ने आरोपी के ठिकाने पर सर्च ऑपरेशन चलाकर कई संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क को लेकर की जा रही इस पूछताछ में कई रसूखदारों और बड़े अफसरों के नाम सामने आ सकते हैं। इस मामले में अब तक एक दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

क्या है 272 प्लॉटों का बहुचर्चित घोटाला?

मामले की शुरुआत साल 2022 में दर्ज एक रिपोर्ट से हुई थी। आरोप है कि भू-माफियाओं ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर हिरण मगरी सेक्टर-11 स्थित निगम के प्लॉट नंबर 546 के फर्जी दस्तावेज तैयार किए।

बदमाशों ने 'किशन पटेल' नाम के फर्जी व्यक्ति के नाम से लीजडीड और नामांतरण पत्र जारी करवा लिए और बाद में इस जमीन को सलूंबर निवासी अनिल कचौरिया को 50.01 लाख रुपये में बेच दिया।

SOG जांच में ऐसे खुलती गईं परतें

SOG की जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी राजेंद्र धाकड़ से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि राजेंद्र ने एकलव्य बस्ती मल्लातलाई निवासी किशनलाल गमेती के बैंक खाते में 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। किशनलाल ने ये पैसे निकालकर किशन मारवाड़ी और राकेश सोलंकी को दिए, जिन्होंने रकम विक्रम ताकड़िया तक पहुंचाई।

उल्लेखनीय है कि नगर विकास न्यास (UDA) ने साल 2012 में नगर निगम को कुछ कॉलोनियां ट्रांसफर की थीं, जिनमें कई बेशकीमती और कॉर्नर के भूखंड खाली थे। सार-संभाल न होने का फायदा उठाकर दलालों और भू-माफियाओं ने नगर निगम कर्मियों की सांठगांठ से इनके फर्जी पट्टे बनवाकर नामांतरण करवा लिए।

राज्यपाल कटारिया और विधायक उठा चुके हैं 500 करोड़ के घोटाले का मुद्दा

इस फर्जीवाड़े को सबसे पहले साल 2022 में कांग्रेस पार्षद अजय पोरवाल ने उजागर किया था, जिसके बाद शुरुआती जांच में निगम ने 48 पट्टों को निरस्त कर दिया था।

इसके बाद पंजाब के राज्यपाल (तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष) गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए इसे करीब 500 करोड़ रुपये का महाघोटाला करार दिया था। अप्रैल 2022 से SOG इस मामले की परतें उधेड़ रही है और लगातार कार्रवाई जारी है।

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क बुलंद आवाज के साथ निष्पक्ष व निर्भीक खबरे... आपको न्याय दिलाने के लिए आपकी आवाज बनेगी कलम की धार... आप भी अपने आस-पास घटित कोई भी सामाजिक घटना, राजनीतिक खबर हमे हमारी ई मेल आईडी [email protected] या वाट्सएप न 8094612000 पर भेज सकते है हम हर सम्भव प्रयास करेंगे आपकी खबर हमारे न्यूज पोर्टल पर साझा करें। हमारे चैनल GEXPRESSNEWS से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद................