गुरलां में शिवमहापुराण कथा:सृष्टि में परिवर्तन ही जीवन का मुख्य आधार,गूंजे 'हर-हर महादेव' के जयकारे
"तांडव सृष्टि का शाश्वत नियम है": पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज के जन्मोत्सव पर गुरलां में उमड़ पड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
गुरलां/कोटड़ी श्याम (बद्री लाल माली )। श्री हरिहर शिवमहापुराण कथा महोत्सव के पावन अवसर पर परम श्रद्धेय गौवत्स पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज का जन्मदिवस अत्यंत भक्तिभाव, श्रद्धा और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। कथा पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने महाराजश्री पर पुष्पवर्षा, माल्यार्पण एवं गगनभेदी जयघोष के साथ उनका आत्मीय अभिनंदन किया।
"परिवर्तन को स्वीकार करना ही जीवन में आगे बढ़ने का आधार" अपने प्रेरणादायी एवं ओजस्वी उद्बोधन में पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज ने कहा कि "तांडव सृष्टि का शाश्वत नियम है। सृष्टि में परिवर्तन ही जीवन का मुख्य आधार है। भगवान शिव का तांडव केवल संहार का प्रतीक नहीं, बल्कि नई सृष्टि, नवचेतना और नवजीवन का उद्घोष है। जो व्यक्ति जीवन में बदलाव और परिवर्तन को स्वीकार करता है, वही निरंतर आगे बढ़ता है।"
अहंकार और अज्ञान का अंत कर भक्ति का करें उदय महाराजश्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ और अज्ञान का अंत करना चाहिए। जब इन बुराइयों का अंत होता है, तभी जीवन में ज्ञान, प्रेम और सच्ची भक्ति का उदय संभव है। भगवान शिव का तांडव हमें यही सिखाता है कि हर अंत अपने साथ एक नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है।
फल एवं प्रसाद अर्पित कर मनाया जन्मोत्सव जन्मोत्सव के इस पावन मौके पर श्रद्धालुओं ने पश्चिमी संस्कृति को दरकिनार करते हुए केक के स्थान पर फल एवं प्रसाद अर्पित कर महाराजश्री का अभिनंदन किया। उपस्थित जनसमूह ने महाराजश्री के दीर्घायु होने, उत्तम स्वास्थ्य एवं सनातन धर्म के निरंतर प्रचार-प्रसार हेतु ईश्वर से प्रार्थना की। पूरा कथा स्थल "हर-हर महादेव" और "जय श्री राम" के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
आयोजन समिति ने सभी पधारे हुए श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि श्री हरिहर शिवमहापुराण कथा महोत्सव में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्तगण पधारकर धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।

