ज़्यादा पढ़े-लिखे युवाओं को बड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कम योग्यता वाले पदों पर ओवर-क्वालिफिकेशन से मरता है गरीबों का हक
सरकारी नौकरियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कम योग्यता वाले पदों पर ओवर-क्वालिफाइड उम्मीदवारों का चयन गलत, जरूरतमंदों का हक मारने पर लगाई रोक
नई दिल्ली / कमलेश जैन । देश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे करोड़ों युवाओं के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से एक बेहद अहम और दूरगामी फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी नौकरियों में पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी करने वाले अभ्यर्थी ही वास्तविक हकदार हैं। कम शैक्षणिक योग्यता वाले पदों पर अत्यधिक पढ़े-लिखे (ओवर-क्वालिफाइड) उम्मीदवारों का प्रवेश उन कम पढ़े-लिखे और गरीब युवाओं के अधिकारों पर सीधा डाका है, जो सिर्फ उन्हीं पदों के भरोसे हैं।
डिग्री छिपाकर नौकरी पाना धोखाधड़ी: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने हाई कोर्ट के उस पुराने आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें एक अस्थायी बैंक सहायक को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि संबंधित कर्मचारी ने 10वीं पास उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पद पर आवेदन करते समय अपनी ग्रेजुएशन (स्नातक) की डिग्री जानबूझकर छिपाई थी। अदालत ने टिप्पणी की कि अपनी उच्च योग्यता छिपाकर पद हासिल करना साफ तौर पर धोखाधड़ी है और ऐसे मामलों में कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती।
'सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता जरूरी'
पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब सरकार या कोई संस्थान किसी विशेष वर्ग या कम योग्यता वाले लोगों के लिए पद निर्धारित करता है, तो उसमें उच्च शैक्षणिक डिग्री धारकों को शामिल होने की अनुमति देना न्यायसंगत नहीं है। ऐसा करने से वे युवा अपने एकमात्र अवसर से वंचित रह जाते हैं जो कानूनी और सामाजिक रूप से उस पद के असली हकदार हैं। शीर्ष अदालत ने दोहराया कि सामाजिक कल्याण और अवसरों की समानता बनाए रखने के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन होना आवश्यक है।

