अर्धनारीश्वर स्वरूप का दिव्य संदेश: शक्ति और शिव का संतुलन ही जीवन की पूर्णता, गुरला में गूंजे 'हर-हर महादेव' के जयकारे
अर्धनारीश्वर स्वरूप में छिपा है समाज और जीवन का महान संदेश: न स्त्री बड़ी न पुरुष, दोनों एक-दूसरे के पूरक — पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज
भीलवाडा (बद्री लाल माली)
गुरला क्षेत्र में आयोजित श्री हरिहर शिवमहापुराण कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए परम श्रद्धेय पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज ने भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अर्धनारीश्वर केवल एक दिव्य स्वरूप मात्र नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के लिए संतुलन और समानता का एक महान संदेश है।
स्त्री और पुरुष का परस्पर सम्मान ही सृष्टि का आधार
कथा व्यास पं. विष्णुश्री ने कहा कि संसार में ना पुरुष बड़ा है और ना ही स्त्री बड़ी है, दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। जिस प्रकार भगवान शिव ने अपने आधे अंग में माता पार्वती को स्थान दिया, वह यह दर्शाता है कि परिवार, समाज और संपूर्ण सृष्टि का संतुलन स्त्री और पुरुष के समान सम्मान, सहयोग तथा समर्पण से ही संभव है।
अधिकारों से अधिक कर्तव्यों की भावना आवश्यक
महाराज श्री ने वर्तमान सामाजिक ताने-बाने पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में केवल अधिकारों की बात करने के बजाय कर्तव्यों की भावना जागृत करने की परम आवश्यकता है। जब परिवार में पति-पत्नी, माता-पिता और भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति आदर और जिम्मेदारी का भाव रखेंगे, तभी सुखी परिवार, समृद्ध समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव हो सकेगा।
जहाँ नारी का सम्मान, वहीं देवत्व का वास
उन्होंने आगे समझाया कि अर्धनारीश्वर स्वरूप हमें शक्ति और शिव, संवेदना और संकल्प तथा करुणा और साहस का अद्भुत संतुलन सिखाता है। जिस घर और समाज में स्त्री का सम्मान होता है, वहीं देवत्व का वास होता है और सुख, शांति व समृद्धि का वातावरण निर्मित होता है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा रसपान करते नजर आए। पंडित जी के ओजस्वी विचारों और भजनों के बीच पूरा पांडाल भगवान भोलेनाथ के जयकारों से गुंजायमान रहा।

