शिक्षाविद अब्दुल वहीद खिलजी की पुस्तक कायनात का गरिमामय माहौल में हुआ विमोचन
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। बज्मे-फरोग उर्दू अदब सोसायटी (रजि.) मकराना के तत्वावधान में कर्बला चौक स्थित अंजूमन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक भव्य एवं गरिमामय साहित्य समागम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मकराना के प्रसिद्ध शिक्षाविद हाजी अब्दुल वहीद खिलजी 'वाहिद' की प्रथम काव्य कृति (अतुकांत शैली) 'कायनात' का विमोचन गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया। पुस्तक के रचयिता शिक्षाविद हाजी अब्दुल वहीद खिलजी 'वाहिद' ने अपनी कृति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि समाज और बच्चों की जिंदगी को बेहतर दिशा देने के उद्देश्य से उन्होंने इस पद्य पुस्तक की रचना की है। उन्होंने अपनी इस प्रथम पुस्तक को माता-पिता की दुआओं, भाई-भाभी के त्याग और मकराना की माटी से जुड़े ग्लोबल राइटर मरहूम खुश्तर मकरानवी की कलम को समर्पित किया है।
मुख्य अतिथि विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने अपने संबोधन में कहा कि मकराना के इस अदबकार ने अपनी छोटी-छोटी अतुकांत रचनाओं से गागर में सागर भरने का काम किया है। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी यह साहित्यिक साधना निश्चित रूप से समाज को एक नई राह दिखाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व आयकर उप निदेशक डॉ. अब्दुल रहमान रिंद ने की। बीकानेर से आए राजस्थान उर्दू अकादमी के पूर्व सदस्य एवं आकाशवाणी उद्घोषक असद अली असद, कुचामन के साहित्यकार डॉ. दिलीप पारीक तथा बीकानेर के डॉ. जियाउल हसन जिया ने पुस्तक की रचनाओं की गहराई और प्रभाव की सराहना करते हुए इसे साहित्य जगत के लिए एक अनमोल देन बताया।
पुस्तक विमोचन के उपरांत एक शानदार मुशायरा आयोजित किया गया, जिसमें कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। असद अली असद (बीकानेर) ने जीवन दर्शन को उजागर करते हुए पढ़ा "तेरे अखलाक को मोहब्बत ने बताया हमको, कैसे इंसान को किया जाता है इंसान अपना।" "शाम तक जैसे धूप ढलती है, रंग दुनिया यूं ही बदलती है।"
जाकिर अदीब (बीकानेर) ने पुस्तक के शीर्षक पर अपनी शायरी पेश की "कुछ इस तरह से हम पे उजागर है कायनात, इक वलवला है, जोश है, तैवर है कायनात।"
पं. कैलाश शर्मा (मकराना) ने दिवंगत साहित्यकार खुश्तर मकरानवी को याद करते हुए पढ़ा "मैंने तुमको देख कर सोचा कि मेरे बहुत नजदीक हो, सोच कर सोचा तो बहुत फासला था।"
कार्यक्रम का कुशल व काव्यमयी संचालन शिक्षाविद अब्दुल रऊफ ने अपनी निजामत में इस शेर के साथ किया "हयात लेके चलो, कायनात लेके चलो, चलो तुम सारे जमाने को साथ लेके चलो। "मुशायरे में सादिक मकरानवी, उगमाराम बडारड़ा, डॉ. जियाउल हसन कादरी, नरेंद्र सिंह नगवाड़ा, लाडनूं के साहित्यकार शंकर आकाश, नवोदित शायर साजिद बल्खी, अब्दुल हफीज खिलजी एवं पं. देवेश स्वामी ने भी अपनी रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी।
समारोह में अब्दुल हमीद बेहलीम, अब्दुल करीम भाटी, दिलीप सिंह शेखावत, सुरेश वर्मा, शिक्षाविद छोटूराम बाजड़ोलिया, दुर्गा प्रसाद व्यास, सीए शहादत अली, नासिर खिलजी, अब्दुल हकीम, आबिद अली शेख, लतीफ खिलजी, अब्दुल रहमान रांदड़, अब्दुल मजीद खिलजी, नंदलाल लाडनूं, रामदेव पारीक, अब्दुल रशीद खिलजी, असद कुरैशी, मो. आरिफ बल्खी, अब्दुल सत्तार बल्खी, बख्तावर सिंह राजपुरोहित, मो. इब्राहिम गैसावत, अबरार अहमद, अब्दुल कयूम, निजामुद्दीन बेहलीम, सजाऊदीन गैसावत, अब्दुल माजिद नकवी, शहादत बलखी, गय्यूर अहमद बलखी, मोहसीन खिलजी, मोहम्मद सलीम खिलजी सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक व साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

