कोटा: 'क्या दरी-पट्टी उठाने पैदा हुए हैं?': पद घटते ही कोटा कांग्रेस में फूटा असंतोष, आलाकमान तक पहुंची इस्तीफों की गूंज

Aug 5, 2026 - 14:36
Aug 5, 2026 - 16:34
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कोटा: 'क्या दरी-पट्टी उठाने पैदा हुए हैं?': पद घटते ही कोटा कांग्रेस में फूटा असंतोष, आलाकमान तक पहुंची इस्तीफों की गूंज

कोटा शहर कांग्रेस में 'डिमोशन' पर घमासान, महासचिव और दो सचिवों ने आलाकमान को भेजा इस्तीफा

 कोटा / राजस्थान 

कोटा शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही पार्टी में उथल-पुथल मच गई है। कार्यकारिणी में पदों में की गई कटौती से नाराज नेताओं का इस्तीफा देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। वरिष्ठ नेता मन्नू मेघवाल के बाद अब शहर कांग्रेस महासचिव बलविंदर सिंह बिल्लू तथा दो सचिव धर्मा गौचर और राजू पहाड़िया ने प्रदेश आलाकमान को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

इस्तीफा देने वाले तीनों नेताओं ने पार्टी आलाकमान और स्थानीय गुटबाजी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नई कार्यकारिणी में केवल चंद नेताओं की परिक्रमा और चापलूसी करने वालों को ही तवज्जो दी गई है। सालों से निष्ठापूर्वक काम कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं को पद घटाकर 'डिमोशन' दे दिया गया, जो उनके स्वाभिमान और आत्मसम्मान के खिलाफ है।

किस नेता ने क्या कहा:

  • बलविंदर सिंह बिल्लू (पूर्व उपाध्यक्ष): "मैं पिछली कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर संगठन की सेवा कर रहा था। इस बार बिना किसी कारण मेरा पद घटाकर महासचिव कर दिया गया। मुझे पद की लालसा नहीं है, लेकिन यह डिमोशन मेरे आत्मसम्मान के विपरीत है।"

  • धर्मा गौचर (पूर्व महासचिव): "पूर्व में जिला कांग्रेस में महासचिव पद पर जिम्मेदारी निभा चुका हूँ। नई सूची में मुझे सचिव बना दिया गया। संगठन के इस फैसले से मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुँची है।"

  • राजू पहाड़िया (सचिव): "लंबी सेवा के बावजूद फिर से सचिव पद पर रखना स्पष्ट रूप से डिमोशन है। क्या हम जिंदगी भर सिर्फ झंडे और दरी-पट्टियां उठाने के लिए ही पैदा हुए हैं? राहुल गांधी जी का नारा 'जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी भागीदारी' का कोटा में पालन नहीं हो रहा है।"

आगामी नगर निगम और निकाय चुनावों पर मंडराया संकट

कार्यकारिणी की सूची जयपुर प्रदेश स्तर से जारी की गई थी, लेकिन कोटा में अलग-अलग गुटों में बंटे नेताओं के इस्तीफों ने संगठन की नींव हिला दी है।

स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोटा शहर में कांग्रेस की अंतर्कलह अब किसी से छिपी नहीं है। अगर हाईकमान ने इस असंतोष को तुरंत काबू में नहीं लिया, तो आने वाले नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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