वॉइस मॉड्यूलेशन और सही ठहराव से साधा जा सकता है हर श्रोता का दिल: आचार्य डाणी

Jul 9, 2026 - 20:00
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वॉइस मॉड्यूलेशन और सही ठहराव से साधा जा सकता है हर श्रोता का दिल: आचार्य डाणी

भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल)  ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी युवाओं को कौशल विकास, व्यक्तित्व निर्माण एवं स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने वाले रूडसेट संस्थान (RUDSETI), सुवाणा में आयोजित पब्लिक स्पीकिंग मास्टरक्लास के दूसरे सत्र का आयोजन उत्साह एवं सहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर प्रख्यात लाइफ कोच, मोटिवेशनल स्पीकर, न्यूरोलॉजिस्ट, पब्लिक स्पीकिंग एवं व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक आचार्य देवेंद्र डाणी ने प्रशिक्षणार्थियों को वॉइस मॉड्यूलेशन (Voice Modulation) की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में आचार्य देवेंद्र डाणी ने बताया कि पिछले सत्र में प्रतिभागियों को बॉडी लैंग्वेज के 55 प्रतिशत प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी, जबकि दूसरे सत्र में संवाद के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पहलू वॉइस मॉड्यूलेशन के 38 प्रतिशत प्रभाव को व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से समझाया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी वक्ता की आवाज़ प्रभावशाली नहीं है तो उसका श्रेष्ठ ज्ञान भी श्रोताओं तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाता।

आचार्य डाणी ने कहा कि आवाज़ केवल शब्दों का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व की पहचान होती है। एक ही बात को अलग-अलग आवाज़, ऊर्जा और लय के साथ बोलने पर उसका प्रभाव पूरी तरह बदल जाता है। इसलिए प्रत्येक वक्ता को अपनी आवाज़ पर निरंतर कार्य करना चाहिए।

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को लो पिच (Low Pitch), मीडियम पिच (Medium Pitch) एवं हाई पिच (High Pitch) के बीच अंतर समझाते हुए बताया कि कब किस प्रकार की आवाज़ का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रेरणादायक संदेश देते समय ऊर्जावान स्वर, संवेदनशील विषयों पर नियंत्रित एवं शांत आवाज़ तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रभावशाली उच्च स्वर का संतुलित प्रयोग श्रोताओं का ध्यान बनाए रखता है। उन्होंने प्रतिभागियों से मंच पर अभ्यास करवाते हुए प्रत्येक की आवाज़, उच्चारण एवं प्रस्तुति शैली का विश्लेषण भी किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार एक ही टोन में बोलना श्रोताओं को उबाऊ लगने लगता है, जबकि आवाज़ में उचित उतार-चढ़ाव, गति और ऊर्जा का संतुलन भाषण को जीवंत बना देता है। उन्होंने प्रतिभागियों को स्पष्ट उच्चारण (Pronunciation), शब्दों पर सही बल (Emphasis), श्वास नियंत्रण (Breath Control), बोलने की गति (Pace) तथा संवाद की लय (Rhythm) बनाए रखने की प्रभावी तकनीकों का अभ्यास कराया।

प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण विषय 'पॉज' (Pause) अर्थात ठहराव की शक्ति रहा। आचार्य देवेंद्र डाणी ने कहा कि "प्रभावशाली वक्ता केवल अच्छा बोलना ही नहीं जानता, बल्कि यह भी जानता है कि कब रुकना है।" उन्होंने बताया कि सही समय पर लिया गया छोटा-सा ठहराव श्रोताओं को विचार करने का अवसर देता है, जिज्ञासा उत्पन्न करता है और वक्ता के संदेश को अधिक प्रभावशाली बना देता है। उन्होंने कहा कि कई बार शब्दों से अधिक प्रभाव एक सार्थक मौन छोड़ता है।

आचार्य डाणी ने बताया कि विश्व के सफल नेता, उद्योगपति, मोटिवेशनल स्पीकर और प्रशिक्षक अपनी आवाज़ के उतार-चढ़ाव, सही ठहराव और प्रभावी अभिव्यक्ति के कारण लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन नियमित अभ्यास करे और अपनी आवाज़ पर कार्य करे तो वह भी एक प्रभावशाली वक्ता बन सकता है।

प्रशिक्षण को पूरी तरह इंटरैक्टिव एवं प्रैक्टिकल रखा गया। प्रतिभागियों को मंच पर बुलाकर उनसे विभिन्न विषयों पर बोलने का अभ्यास कराया गया तथा उनकी आवाज़, आत्मविश्वास और प्रस्तुति शैली का व्यक्तिगत मूल्यांकन कर सुधार के सुझाव दिए गए। प्रशिक्षणार्थियों ने इस सत्र को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक एवं जीवनोपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उनके भीतर मंच पर बोलने का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।

इस अवसर पर रूडसेट संस्थान के अनिरुद्ध सर, सत्यनारायण नागर, सुधा शर्मा सहित संस्थान के अन्य प्रशिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। सभी ने आचार्य देवेंद्र डाणी के व्यवहारिक प्रशिक्षण, सरल प्रस्तुतीकरण शैली एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण युवाओं के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, प्रभावी संचार कौशल तथा करियर निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

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