मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी का 60 वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया

Jun 24, 2025 - 14:42
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मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी का 60 वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया

भरतपुर :(कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) "मातेश्वरी जगदम्बा ने सभी रूढ़िवादी अंध विश्वास की परंपराओं को मान्यताओं को आधात्म में बदल दिया| कैसी थी वह भीनी भीनी मुस्कुराहट जिसे शिव पिता और ब्रह्मा बाबा ने ज्ञान रंग से चित्रांकित किया | वे निर्मल नैन जिनसे योग तपस्या की प्रकाश रश्मियां जिस पर पड़ती उस में ही योग के पंखों से फर्श से अर्श पर ले जाती| वे एक अहिंसक सेना की सेनापति दिखाई देती थी ऐसी चाल ढाल जिसमें योग और राज मिलकर उसे बहुत ही भव्य, दिव्य, सुसभ्य बनाते थे स्वयं प्रजापिता ब्रह्मा उन्हें माला के युग्म मनके में स्थान देते उन्हें 'यज्ञ माता' की उपाधि देते थे,वही तो प्रथम शीतला मां संतोषी मां और अन्नपूर्णा मां थी |योगियों में वे सर्व महान थी धर्म- दर्शन- मजहब और इमान थी |वे मदर- ए -जहान थी |"उक्त विचार मातेश्वरी जगदम्बा जी के 60वें पुण्य स्मृति दिवस पर आगरा सबजोन सह प्रभारी एवं भरतपुर सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्र. कु. कविता दीदी ने अपने वक्तव्य में प्रस्तुत किये | आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय विश्व शांति भवन भरतपुर पर संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जी का 60वां पुण्य स्मृति दिवस 'आध्यात्मिक ज्ञान दिवस' के रूप में मनाया गया |
कार्यक्रम में सुबह 5.30 बजे से ही योग तपस्या शुरू हुई एवं 7.00 बजे से ईश्वरीय महावाक्य सुनाये गए उसके बाद मातेश्वरी जी को भोग स्वीकार कराया गया एवं उसके बाद मंचीय कार्यक्रम हुआ |  कार्यक्रम की शुरुआत  मातेश्वरी जी के स्मृति के गीत 'माँ तो माँ होती है माँ से बढ़कर कोई और नहीं ' ब्र. कु. गीता बहन ने की | उसके बाद आए हुए अतिथियों का तिलक, बैज, पुष्प के द्वारा स्वागत किया गया |
मातेश्वरी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए भरतपुर सेवाकेंद्र सह प्रभारी एवं रूपवास सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बबीता दीदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि मम्मा के जीवन से प्रेरणा लेकर लाखों भाई बहने यज्ञ में समर्पित होकर प्रभु आज्ञा पर चल रहे हैं| मामा की स्थिति बहुत श्रेष्ठ थी तथा भगवान पर संपूर्ण निश्चय था |मम्मा ने पत्थरों में फूल खिलाए,रेगिस्तान में जल की नदियां बहायी| मम्मा को हर क्षण स्मृति रहती की हर घड़ी अंतिम घड़ी है,हुक्मि हुक्म चला रहा है |
कार्यक्रम में आए हुए अतिथि  जिला समन्वयक आर्ट ऑफ़ लिविंग भ्राता हरिओम फौजदार ने अपने वक्तव्य में कहा कि मम्मा का जीवन बहुत ही छोटा था और उपलब्धियां विशाल थी|मुझे उनके बारे में सुनकर बहुत ही अतिन्द्रिय सुख का अनुभव हो रहा है |ऐसा लग रहा है वो मेरी भी माँ है मुझे उनकी शक्ति मिल रही है|
विशिष्ट अतिथि पूर्व निदेशक पशु पालन, विभाग  योगेंद्र सिंह ,रिटायर कर्नल ओमवीर सिंह  सैनी समाज जिला अध्यक्ष, ब्र. कु. जुगल किशोर सैनी ने भी मम्मा की विशेषताओ का वर्णन करते हुए कहा कि मम्मा अर्थात "ममतामयी माँ" वह ममता की मूरत थी यज्ञ की स्थापना में उनकी शिरोमणि पवित्रता, घोर तपस्या, अटूट निश्चय इत्यादि की तो जितनी महिमा की जाए उतनी ही कम है| 
 ब्र. कु.योगिता बहन,जागृति बहन, पावन बहन, रजनी बहन ने मम्मा की विशेषताओ पर प्रकाश डाला एवं ब्र. कु. जयसिंह भाई ने सभी का धन्यवाद किया|
  डीग उप सेवा केंद्र प्रभारी ब्र.कु प्रवीना दीदी ने अंत में मातेश्वरी जी की स्मृति का गीत प्रस्तुत किया एवं कुशल मंच संचालन किया|  सभी अतिथियों एवं भाई बहिनों ने मातेश्वरी जी को शब्द सुमन के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की | अंत में सभी को ईश्वरीय साहित्य सौगात एवं प्रसाद भेंट किया,  इस कार्यक्रम में भगवान सिंह भाई,सुदेश भाई,रणवीर, ओमप्रकाश, महेश,हेमंत,सुरेश, संजय, सुभाष,रजनी, प्रेम, कुसुम, रामवती किरण, एवं अन्य भाई बहिने मौजूद रहे|

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