जर्जर मंगलाना-मकराना ओवरब्रिज बन सकता है हादसे का सबब, अधिवक्ताओं ने विधिक सेवा केंद्र में पेश किया प्री-लिटिगेशन प्रार्थना पत्र
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। मंगलाना से मकराना के बीच रेलवे लाइन पर बना ओवरब्रिज लंबे समय से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के सजग अधिवक्ताओं ने 'तालुक विधिक सेवा केंद्र (परबतसर/मकराना)' के समक्ष एक प्री-लिटिगेशन प्रार्थना पत्र पेश कर पुल की मरम्मत कराने और वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करने की मांग की है।
अधिवक्ताओं द्वारा सार्वजनिक निर्माण विभाग (परबतसर व मकराना), उत्तरी पश्चिमी रेलवे जोधपुर के डिवीजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम), जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (डीडवाना-कुचामन) को मामले में पक्षकार बनाते हुए त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई गई है। प्रार्थना पत्र में बताया गया कि इस ओवरब्रिज में आई दरारें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। विभाग द्वारा वर्तमान में इस मार्ग से बसों और भारी वाहनों का संचालन तो बंद कर दिया गया है, लेकिन छोटे वाहनों की आवाजाही अभी भी जारी है।
स्थानीय नागरिक और नियमित रूप से आने-जाने वाले लोग मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुल से गुजर रहे हैं, क्योंकि यह जर्जर ओवरब्रिज किसी भी समय गिर सकता है।अधिवक्ताओं ने बताया कि मकराना एक विश्वप्रसिद्ध मार्बल मंडी है, जहां से देश-विदेश में मार्बल का परिवहन किया जाता है। इस मुख्य रास्ते के बाधित होने से मार्बल का परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इसके चलते व्यापारियों को समय और धन की भारी हानि उठानी पड़ रही है और व्यापार पूरी तरह चौपट होने की कगार पर है। हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को लेकर आम जनता द्वारा संबंधित विभागों को पहले भी कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं और समाचार पत्रों में भी खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित करने के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण हर समय बड़ी जनहानि होने की संभावना बनी रहती है।
अधिवक्ताओं ने विधिक सेवा केंद्र के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि आपसी समझाइश और समन्वय से इस ओवरब्रिज को अविलंब ठीक करवाया जाए। जब तक ओवरब्रिज की मरम्मत का कार्य चलता है, तब तक आमजन की सुरक्षा के लिए वहां पहले से मौजूद रेलवे फाटक को पूर्व की भांति सुचारू रूप से संचालित किया जाए। रेलवे फाटक शुरू होने के बाद, ओवरब्रिज के पूरी तरह ठीक होने तक इस जर्जर पुल से छोटे वाहनों का आवागमन भी पूर्णतः बंद कर दिया जाए ताकि किसी भी संभावित हादसे और जनहानि से बचा जा सके।


