विश्व कल्याण और गौ-रक्षार्थ की कामना ही यज्ञ का मूल उद्देश्य: महंत कृष्ण दास मोनी महाराज; अरणी मंथन से प्रकट अग्नि में सनातनी भक्त दे रहे आहुतियां

May 24, 2026 - 17:47
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विश्व कल्याण और गौ-रक्षार्थ की कामना ही यज्ञ का मूल उद्देश्य: महंत कृष्ण दास मोनी महाराज; अरणी मंथन से प्रकट अग्नि में सनातनी भक्त दे रहे आहुतियां

गुरला (बद्रीलाल माली)। भीलवाड़ा शहर के मध्य स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देवरिया बालाजी आश्रम में इन दिनों भक्ति और सनातनी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। आश्रम के महंत श्री कृष्ण दास (मोनी बाबा) महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय पंच कुण्डात्मक श्री मारूति महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आहुतियां दे रहे हैं। गत 19 मई से प्रारंभ हुआ यह महायज्ञ आगामी 25 मई, सोमवार को गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में पूर्ण आहुति के साथ संपन्न होगा।

  • यज्ञ के धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक लाभ भी: मोनी महाराज

महायज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए देवरिया बालाजी आश्रम के महंत श्री कृष्ण दास (मोनी बाबा) महाराज ने कहा कि इस महायज्ञ का मूल उद्देश्य गौ रक्षार्थ और विश्व कल्याण की भावना है। उन्होंने बताया कि यज्ञ के आयोजन से जहां एक ओर आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ प्राप्त होता है, वहीं दूसरी ओर इसके कई वैज्ञानिक लाभ भी हैं। यज्ञ से निकलने वाला औषधीय धुआं पर्यावरण को शुद्ध करता है और हमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाता है। लोक कल्याण ही यज्ञ की आत्मा है।

  • अरणी मंथन से प्रकट की गई अग्नि, प्रतिदिन हो रहे विशेष अनुष्ठान

देवरिया बालाजी के परम भक्त गोपाल लाल माली ने यज्ञ की व्यवस्थाओं और विधि-विधान की जानकारी देते हुए बताया कि यज्ञाचार्य पंडित धर्मनारायण वेदाचार्य के मार्गदर्शन में प्रतिदिन सुबह और दोपहर के सत्रों में आहुतियां दी जा रही हैं। यज्ञ का समय प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:30 बजे तक तथा मध्याह्न 3:00 बजे से सायंकाल 5:30 बजे तक निर्धारित है।

अनुष्ठान के तहत प्रतिदिन प्रायश्चित कर्म, दस विधि स्नान, पंचांग पूजन, देव स्थापना और दिव्य आरती की जा रही है। विशेष बात यह है कि प्रातः काल देवपूजन के बाद 'अरणी मंथन' (लकड़ी के घर्षण) द्वारा वैदिक पद्धति से अग्नि प्रकट कर हवन कार्य प्रारंभ किया जाता है।

  • यज्ञ से आती है सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा

गोपाल लाल माली ने आगे कहा कि यज्ञ केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन को शुद्ध, सात्विक और शक्तिशाली बनाने का एक दिव्य माध्यम है। शास्त्र सम्मत मान्यता है कि जिस स्थान पर यज्ञ होता है, वहां देवताओं का वास होता है। इससे घरों में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा संपूर्ण क्षेत्र से नकारात्मकता का नाश होता है। यह आयोजन हमारी संस्कृति, धर्म और संस्कारों को मजबूती प्रदान कर रहा है।

इस सात दिवसीय भव्य अनुष्ठान की संपूर्ण व्यवस्थाओं, सेवा और देखरेख का कार्य श्री मारूति महायज्ञ समिति तथा भीलवाड़ा के समस्त सनातनी भक्तों द्वारा पूरी श्रद्धा और सेवा भाव के साथ किया जा रहा है। समिति ने आगामी सोमवार को होने वाली मुख्य पूर्णाहुति में सभी धर्मप्रेमियों को सादर आमंत्रित किया है।

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