भीलवाड़ा एसीबी कोर्ट का बड़ा फैसला: कृषि बिजली कनेक्शन के बदले 200 रुपए रिश्वत लेने वाले लाइनमैन को 4 साल की जेल

May 24, 2026 - 13:25
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भीलवाड़ा एसीबी कोर्ट का बड़ा फैसला: कृषि बिजली कनेक्शन के बदले 200 रुपए रिश्वत लेने वाले लाइनमैन को 4 साल की जेल

भीलवाड़ा (राजस्थान) भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कृषि बिजली कनेक्शन को दोबारा जोड़ने के एवज में महज 200 रुपए की रिश्वत मांगने और लेने के 11 साल पुराने मामले में डिस्कॉम के तत्कालीन लाइनमैन मूलचंद माली को दोषी करार दिया है। विशेष अदालत के न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने आरोपी लाइनमैन को 4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 7 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश कुमार अग्रवाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला जून 2015 का है। परिवादी नारायण सिंह शक्तावत ने 23 जून 2015 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के तत्कालीन डिप्टी एसपी कृष्णकांत शर्मा के समक्ष एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि आमली (बनेड़ा) गांव में उनकी दिवंगत दादी मांगी राजपूत के नाम पर एक कृषि बिजली कनेक्शन था। जून 2015 के बिजली बिल को जमा कराने की अंतिम तिथि 22 जून तय की गई थी, परंतु बनेड़ा ग्रिड पर तैनात लाइनमैन मूलचंद माली ने नियत समय से पहले ही कनेक्शन काट दिया। जब परिवादी ने बिल जमा कराने के बाद लाइनमैन से संपर्क किया, तो आरोपी ने कनेक्शन को दोबारा जोड़ने के लिए 650 रुपए की आधिकारिक रसीद काटने के साथ-साथ खुद के लिए 200 रुपए की अवैध रिश्वत की मांग की।

  • डिजिटल वॉइस रिकॉर्डिंग बनी अकाट्य सबूत:

शिकायत प्राप्त होते ही एसीबी की टीम ने रिश्वत की मांग का गोपनीय सत्यापन (Verification) शुरू किया। कांस्टेबल रामपाल के सहयोग से एक डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर का प्रबंध किया गया। परिवादी नारायण सिंह ने लाइनमैन मूलचंद माली को फोन मिलाकर बातचीत को हैंड्स-फ्री मोड पर डाला, जिससे आरोपी की रिश्वत मांगने की पूरी बातचीत रिकॉर्डर में अकाट्य साक्ष्य के रूप में दर्ज हो गई।

रइशके बाद, रिश्वत की मांग की पुष्टि हो जाने के तत्काल बाद एसीबी की टीम ने आरोपी को रंगे हाथों दबोचने के लिए एक सुनियोजित ट्रैप की योजना बनाई। एसीबी की टीम पूरी तैयारी के साथ आमली गांव पहुंची। इस दौरान आरोपी लाइनमैन ने चालाकी बरतते हुए परिवादी को खेत के पास स्थित कैंची (तिराहे) पर बुलाया। जैसे ही लाइनमैन मूलचंद माली तय स्थान पर पहुंचा और उसने परिवादी नारायण सिंह से कुल 850 रुपए (650 रुपए रसीद के तथा 200 रुपए रिश्वत के) हस्तगत किए, परिवादी ने पूर्व-नियोजित योजना के अनुसार एसीबी टीम को गुप्त इशारा कर दिया। इशारा मिलते ही घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मूलचंद माली को मौके पर ही रंगे हाथों (ट्रैप) गिरफ्तार कर लिया।

अदालत में मामले की लंबी सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने एसीबी द्वारा प्रस्तुत डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी मूलचंद माली को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 4 साल के कारावास और 7000 रुपए के जुर्माने की सख्त सजा से दंडित किया। कानून के जानकारों का मानना है कि यह फैसला सरकारी तंत्र में बैठे उन भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान करते हैं।

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