सावन के दूसरे सोमवार पर शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) सावन महीने के दूसरे सोमवार को आज पूरे उपखंड क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा की भावनाओं से सराबोर रहा। लक्ष्मणगढ़ में सुबह से ही श्रद्धालु भोलेनाथ के मंदिरों की ओर उमड़ पड़े और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कस्बे से लेकर ग्रामीण अंचलों तक के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। शहर के बावड़ी वाले मंदिर महादेव, पाराशर मोहल्ला मंदिर तहसील परिसर महादेव मंदिर, चोपड़ा बाजार स्थित खंडेलवाल धर्मशाला स्थित एवं कस्बे में जगह-जगह स्थित मंदिरों में विशेष आयोजन किए गए। इन मंदिरों में शिवालय में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे मंदिर परिसर में सुबह से ही चहल-पहल बनी रही।
भोर होते ही शुरू हुआ शिवभक्तों का तांता:
सुबह होते ही श्रद्धालु परिवार सहित शिव मंदिरों में पहुंचने लगे।कई मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें नजर आईं. पुरुष, महिलाएं और बच्चे बेलपत्र, दूध, गंगाजल, शहद और जल से भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंचे। खासकर युवाओं और महिला बच्चों श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
सावन के इस पावन सोमवार को भक्तों ने व्रत रखकर शिव की उपासना की।पंडितों के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजन कराया। कुछ शिवालयों में दिनभर भजन-कीर्तन और शाम को आरती का आयोजन भी किया गया।सावन में हर सोमवार को भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन शिव जी का अभिषेक करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
आज ही कामिका एकादशी-
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है । वर्षभर में कुल 24 एकादशी आती हैं। जो हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में पड़ती हैं। इन सभी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। लेकिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विशेष माना गया है।इस एकादशी को कामिका एकादशी और पवित्रा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के उपेन्द्र स्वरूप की पूजा का विधान है।
व्रत-पूजन से पूरी होती हैं मनोकामनाएं-
पंडित लोकेश कुमार योग शिक्षक ने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त सच्चे मन से व्रत करता है और श्रद्धा से भगवान विष्णु का पूजन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. एकादशी व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.उन्होंने कहा कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें. श्रीविष्णुसहस्रनाम और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें, जिनके पास अधिक समय नहीं है, वे केवल एक माला मंत्र जाप करके भी पुण्य प्राप्त कर सकते हैं. श्रीमद्भागवत गीता का पाठ भी अत्यंत शुभ माना गया है.
न करें एकादशी पर:
- इस दिन घर में झाडू लगाना वर्जित है क्योंकि इससे सूक्ष्म जीवों की मृत्यु हो सकती है.
- बाल कटवाना और किसी का दिया अन्न ग्रहण करना वर्जित है।
- चावल न तो स्वयं खाएं, न किसी को खिलाएं।
- सात्विक जीवनशैली अपनाएं और यथाशक्ति अन्नदान करें।

