अब नहीं चाहिए महंगी रासायनिक खाद, घर पर बनाएं 'जीवामृत' और पाएं दोगुनी पैदावार

Jul 21, 2025 - 13:47
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अब नहीं चाहिए महंगी रासायनिक खाद, घर पर बनाएं 'जीवामृत' और पाएं दोगुनी पैदावार

लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) किसानों के द्वारा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से खेतों की मिट्टी दिन-ब-दिन बेजान होती जा रही है। और इससे तैयार फसलें सेहत के लिए भी खतरा बनती जा रही हैं।अब किसान एक बार फिर प्राकृतिक खेती की ओर लौट रहे हैं। इस दिशा में जीवामृत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ ही फसलों की गुणवत्ता भी सुधारती है।
रासायनिक खेती से सेहत और मिट्टी दोनों पर खतरा 
कई अध्ययन और वैज्ञानिक चेतावनियां यह साबित कर चुकी हैं कि केमिकल युक्त खेती से न केवल फसलें जहरीली हो रही हैं, बल्कि उन्हें खाने से कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और पाचन संबंधी रोग जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। साथ ही, लंबे समय तक रासायनिक उर्वरक के उपयोग से मिट्टी की संरचना और उपजाऊ क्षमता भी नष्ट हो जाती है।
प्राकृतिक खेती में “जीवामृत” बना रहा नई उम्मीद 
जीवामृत, एक पूर्णतः जैविक खाद है, जो खेत की मिट्टी को फिर से सक्रिय और उर्वर बनाता है।यह खेती को रासायनिक निर्भरता से मुक्त कर एक हरित और टिकाऊ विकल्प प्रदान करता है। इसे उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश प्रांत में किसान घर पर ही कम लागत में आसानी से तैयार कर रहे हैं।
कैसे तैयार करें जीवामृत? आसान विधि - कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार बताते हैं कि जीवामृत तैयार करना बेहद सरल है। और इसके लिए आवश्यक सामग्री भी आसपास से ही जुटाई जा सकती है.

  • 10 किलो देसी गाय का गोबर
  • 10 लीटर गोमूत्र
  • 2 किलो बेसन
  • 2 किलो गुड़
  • थोड़ी मात्रा में पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी
  • 200 लीटर पानी और एक ड्रम

इन सभी को ड्रम में मिलाकर, लकड़ी की छड़ी से घड़ी की दिशा में घुमाएं, और मिश्रण को दो दिन तक ढककर रखें‌। इसके बाद इस घोल को स्प्रे या सिंचाई के जरिए खेतों में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या को बढ़ाता है, जो मिट्टी की उर्वरता में अहम भूमिका निभाते हैं।
स्वाद, पोषण और पैदावार में सुधार - जीवामृत के इस्तेमाल से किसानों को कई फायदे होते हैं।

  • रासायनिक खाद पर निर्भरता खत्म होती है।
  • पोषक तत्वों से भरपूर फसलें तैयार होती हैं।
  • फल, सब्जी और अनाज का स्वाद बेहतर होता है।
  • मिट्टी में जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है, जिससे उर्वरता में सुधार होता है।
  • किसान को कम लागत में ज्यादा मुनाफा होता है.
  • उपभोक्ता को स्वस्थ और सुरक्षित भोजन मिलता है।

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