धामेंडा धाम वृक्षारोपण जन अभियान: संतो-महापुरुषों की जयंती से लेकर त्योहारों पर भी पौधारोपण कर बना जन अभियान
नारायणपुर (भारत कुमार शर्मा) पर्यावरण संरक्षण व पौधारोपण जन अभियान को लेकर कार्य कर रही श्री कृष्णा शिक्षा एवं ग्रामीण विकास समिति एनजीओ द्वारा पर्यावरण बचाओ पेड़ पौधे लगाओं महा अभियान चलाकर संतों, महापुरुषों की जयंती से लेकर त्योहारों पर भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही हैं। नारायणपुर उपखण्ड के लक्ष्मीपति जगन्नाथ मंदिर डूंगरी, खुमरेडी श्मशान घाट, अरावली पर्वतमाला पर स्थित बाबा पीर संज्यानाथजी महाराज की तपोस्थली धामेड़ा धाम सहित सार्वजनिक व धार्मिक स्थानों पर हर साल बरसाती सीजन शुरू होते ही पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं और इसके बाद साल भर इन पौधों की देखभाल का जिम्मा भी संभाला जा रहा है। संस्था द्वारा लोगों को प्रतिदिन जागरुक कर पेड़ पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वर्तमान में धामेड़ा धाम में संस्था द्वारा 12000 पौधे लगाने के लक्ष्य को लेकर कार्य कर रही है। इसके अतिरिक्त गुलेल से बीज बिखेरने, सीड़बोल बनाकर पहाड़ी क्षेत्र में डालने पर लाखों पौधे अंकुरित हो रहे हैं जिससे पहाड़ हरा भरा दिखाई दे रहा है।
- सात वर्षो से चल रहा अभियान
श्री कृष्णा शिक्षा एवं ग्रामीण विकास समिति नारायणपुर पिछले सात वर्षाें से पौधारोपण अभियान चलाए हुए है। अभी तक संस्था की ओर से सात हजार से अधिक पौधे रोपित करने के साथ-साथ लोगों में वितरित किए गए हैं। संस्था के पदाधिकारी किसी भी संत, महापुरुष की जयंती पर लोगों के बीच पहुंचते हैं और उनके नाम से पौधारोपण करवाते हैं। इतना ही नहीं मानसून सीजन में अलग-अलग जगहों पर शिविर लगाकर लोगों को पौधे वितरित किए जाते हैं। अब संस्था के पदाधिकारियों को देखकर कई कालोनियों, ढाणियों में छोटे-छोटे बच्चे भी अपना जन्मदिन पौधे रोपित कर मनाने लगे हैं। जो पौधे लगाते हैं उनके नाम का ट्रीगार्ड भी लगाकर पूरे वर्ष पर देखरेख व संरक्षण किया जाता है।
- रविवार मतलब पौधों के साथ रहने का दिन
श्री कृष्णा शिक्षा एवं ग्रामीण विकास समिति 7 वर्ष से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण के काम में जुटा है। श्री कृष्णा शिक्षा एवं ग्रामीण विकास समिति सचिव सुनील कुमार शर्मा बताते हैं कि उनके लिए रविवार या अन्य कोई भी छुट्टी मतलब दिन भर पौधों के साथ रहने का दिन है। रविवार को वह सुबह ही अपने घर से फलदार एवं छायादार पौधों के बीज, पौधे और इन्हें रोपित करने के लिए जरूरी औजार साथ में लेकर निकल पड़ते हैं। इसके बाद जहां भी किसी पार्क, श्मशान घाट और सार्वजनिक, धार्मिक स्थल पर उपयुक्त स्थान मिलता है, वहां पर पौधे रोपित करते हैं। उनकी और पूरी टीम की छुट्टी पौधों के साथ ही व्यतीत होती है। लोग भी पौधरोपण का महत्व समझकर उन्हें सहयोग करते हैं


