श्रीमद् शिव पुराण कथा के तीसरे दिन शिव विवाह की कथा सुनाई
राजगढ़ (अलवर) अनिल गुप्ता
राजगढ़ पंचायत समिति के सकट क्षेत्र के देवती राम सागर बांध के पास मुर्राटा गांव जोगियों की ढाणी स्थित महादेव मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन शिव विवाह की कथा सुनाई।
कथा वाचक आचार्य योगी कमलेश नाथ ने बताया कि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही शिव में लीन हो जाना है। भगवान शंकर वैराग्य के देवता माने गये है। बाबजूद शिव ने विवाह कर गृहस्थ आश्रम में रहकर वैराग्य धर्म का अनुसरण करने का तरीका दिया। कथावाचक ने कहा कि शिव परिवार में भगवान का वाहन नंदी, मां पार्वती का शेर, गणेश भगवान का मूषक और कार्तिकेय का वाहन मोर है। सभी विपरीत विचारधारा के बीच सामंजस्य रखना शिव पुराण सिखाता है। उन्होनें भगवान के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि मैंना देवी व हिमालय राज की पुत्री के रूप में मां पार्वती जन्म लेकर भगवान शिव की घोर तपस्या की। उसी दौरान ताडकासुर के आतंक को खत्म करने के लिये शिव का तंद्रा भंग हुई। तब जाकर शिव का विवाह हुआ। यह सात दिवसीय श्रीमद शिव महापुराण कथा सात अगस्त तक चलेगी जिसका समय प्रातः 10 बजे से शाम कर 4 बजे तक रहेगा।
इस अवसर पर रामजीलाल, बिहारी नाथ, रामस्वरूप जोगी, कालूराम योगी, हजारीलाल योगी, बनवारी लाल सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।