फलदार बगीचों की समस्याओं का अवलोकन कर बताया समाधान
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) 04 अगस्त। कृषि महाविद्यालय भुसावर की विशेषज्ञ टीम ने भुसावर क्षेत्र के गांव रन्धीरगढ में फलदार बगीचों की समस्याओं का अवलोकन किया।
महाविद्यालय के डीन एवं उद्यान विज्ञ डॉ. उदय भान सिंह ने बताया कि आंवला में अफलन मुख्य समस्या है। उन्होंने बताया कि किसान आंवला में उचित मात्रा में खाद एवं उर्वरक नही देते तथा उचित पोषण के अभाव में फल गिर जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऑवला के 8 वर्ष या अधिक आयु के पौधे में दिसम्बर-जनवरी माह में 80 किलोग्राम गोबर की खाद, डेढ किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट, 400 ग्राम पोटाश व 400 ग्राम यूरिया प्रति पौधा पौधे के फैलाव के अनुसार थाला बनाकर देना चाहिए। आम व आंवला में तना छेदक कीट का प्रकोप भी पाया गया। उन्होंने इसके नियंत्रण के लिए तना छेदक कीट द्वारा बनाये गये छेद को साफ करके क्लोरोपाइरीफॉंस 20 ईसी 2 मिली प्रति लीटर घोल को सिरिंज के द्वारा छेद मे भरें तथा छेद को रूई के फावे अथवा गीली मिट्टी से बन्द करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों के पास बगीचों के लिए उचित यंत्रो का भी अभाव है। गाईन के लिए छोटा ट्रेक्टर या गार्डन ट्रेक्टर, गार्डन के लिए विशेष रूप से बने रोटावेटर, बेसिन फॉर्मर, गन स्प्रेयर, कल्टीवेटर आदि की आवश्यकता होती है। टीम में डॉ. राहुल कुमार, डॉ. शंकर लाल यादव व कृषि पर्यवेक्षक हेमसिंह अम्बेश शामिल रहे।