स्वाध्याय के समान दूसरा कोई तप नहीं, जो माया करे वो भगवान कैसे हो सकता है-- संजय मुनि
भूखे रहकर तप नही किया जा सकता किन्तु तप करके भूखा रह सकते है ----- प्रकाश मुनि
रेल मगरा (पप्पूलाल कीर) रेल मगरा के तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व के सुअवसर पर आचार्य महाश्रमण जी के विद्वान् सन्त मुनि संजय कुमार जी ने महापर्व के दूसरे दिन कहा कि बहुत से लोग कहते हे ये सब भगवान की माया हैं । हमारा मानना है कि भगवान माया नही करते। जो माया करे वो भगवान कैसे हो सकता है। भगवान तो वीतराग होते है । वीतराग माया नही करते। मुनि ने कहा महावीर की आराधना करने से हम भी महावीर बन सकते हे । महावीर ने न्यसार के पहले भव में सम्यक्त की प्रप्ति की थी। आचार्य तुलसी ने चोवीसी के माध्यम से भगवान का वास्तविक स्वरूप बताया ।
मुनि प्रकाश कुमार जी ने आगम पर आधारित प्रवचन देते हुवे कहा जिसका चिंतन सही होता है वह दुःख में सुख की खोज करता है और जिसका सोच गलत होता है वह सुख में दुःख की खोज कर लेता है । पैर की मोच और गलत सोच जीवन में आगे नही बढ़ने देती । स्वाध्याय दिवस पर समग्रता से विचार व्यक्त करते हुवे मुनि सिद्ध प्रज्ञ ज़ी ने कहा सभी धर्मों और शास्त्रो में स्वाध्याय की बहुत महिमा बताई । स्वध्याय का मतलब केवल पुस्तक पढ़ना ही नही बल्कि स्वध्याय का अर्थ है स्वयं का अध्ययन भी करना । जिज्ञासा, चितारना अनुप्रेक्षा और धमे कथा भी स्वाध्याय हे ।
स्वाध्याय के माध्यम से निर्जरा के सभी प्रकार के लाभ मिल सकते हे । मुनि ने आचार्य महाप्रज्ञ जी की पुस्तकें में कुछ होना चाहता हु, मन का कायाकल्प और जीवन की पोथी जैसे महान ग्रन्थ का स्वाध्याय करने की प्रेरणा दी । इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल की सोनी परिवार से जुडी महिलाओं ने संजय मुनि के गीत का सुमधुर संगान किया । 95 वर्षीय श्रद्धा निष्ठ श्रावक ने बेले की तपस्या में आठ प्रहरी पौषध करके सभी को आश्चर्यचकित कर दिया । तेरापंथ सभा अध्यक्ष मुकेश जी मेहता ने बताया कि कालू विहार में अखण्ड जप का क्रम बहुत अच्छी तरह से चल रहा है । तेरापन्थ सभा मंत्री श्री रमेश जी ढालावत ने बताया कि महापर्व के आराधना की सभी तैयारी की जा रही ।