संत की असली संपत्ति भगवत कथा और भगवान का नाम : श्याम बाबा
खैरथल (हीरालाल भूरानी)। कस्बे के विजय पार्क में आयोजित भव्य सत्संग समारोह में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। समारोह में बाबा आयाराम दरबार, सरदार नगर (अहमदाबाद) के गद्दी नशीन संत जीवण राम उर्फ श्याम बाबा ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक संत की असली संपत्ति संसार की सुख-सुविधाएं नहीं, बल्कि भगवत कथा और भगवान का नाम ही है। संत के पास जो भी आता है, वह उसे इसी अनमोल संपत्ति का दान देते हैं।
- प्रेरक प्रसंग: जब संत की कृपा से एक गरीब बना 'अजवायन का बड़ा व्यापारी'
सत्संग के दौरान संत जीवण राम ने एक बेहद मर्मस्पर्शी और प्रेरक कथा सुनाई। उन्होंने बताया— "एक बार एक अत्यंत गरीब व्यक्ति था, जिसके पास आजीविका का कोई साधन नहीं था। एक दिन उसके द्वार पर एक संत आए। गरीब व्यक्ति संत के चरणों से लिपटकर रोने लगा और अपनी विपदा सुनाई। संत ने उसकी बात सुनकर कहा— 'तुम किराने की दुकान खोलो।' गरीब ने लाचारी जताते हुए कहा कि दुकान खोलने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। तब संत ने उसे एक अनोखा उपाय बताया कि तुम केवल 'अजवायन' की दुकान खोलो। अजवायन सस्ती मिलती है। कोई भी ग्राहक आए, तुम बस अजवायन के गुण गाओ और बाकी सब भगवान पर छोड़ दो।"
संत ने आगे बताया कि उस व्यक्ति ने गुरु वचनों पर विश्वास किया और अजवायन लेकर बैठ गया। जो भी ग्राहक आता, वह उससे कहता— "भाई! अजवायन ले जाओ, यह चमत्कारी चीज है। इससे पेट साफ रहता है, भोजन हजम होता है और बीमारियां दूर रहती हैं। इसे रोटी, सब्जी, सलाद या चाय में डालो और सदा सुख पाओ।" धीरे-धीरे लोग उसे "अजवायन वाला" कहने लगे और वह एक दिन अजवायन का बहुत बड़ा व्यापारी बन गया।
- प्रभु का नाम ही जीव का कल्याण कर सकता है
कथा का मर्म समझाते हुए लोकेशानन्द के संदर्भ से संत ने कहा कि जिस प्रकार उस गरीब के पास बेचने के लिए केवल अजवायन थी, ठीक उसी प्रकार एक संत के पास भी केवल भगवान का नाम और उनकी कथा ही होती है। संत के पास कोई भी व्यक्ति किसी भी सांसारिक समस्या या इच्छा को लेकर क्यों न आए, संत उसे केवल प्रभु नाम और हरि कथा का ही मार्ग दिखाते हैं। उनके पास इसके अलावा और कुछ है भी नहीं। भगवान का नाम ही संत की कुल जमा-पूंजी है और यही नाम जीव का परम कल्याण कर सकता है।


