क्षमावाणी पर्व कल जीवन में मधुरता लाने के लिए, मांगेगे गलतियों की माफी
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन ) क्षमावाणी पर्व के अवसर पर दिगंबर जैन मंदिर में कल यानी पड़वा के दिन भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की जाएगी, जिसके बाद श्रद्धालु एक-दूसरे से और संसार के सभी जीवों से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगेंगे। जैन धर्म के अनुसार, क्षमा मांगने और देने से व्यक्ति के कर्मों का बोझ हल्का होता है।
जैन धर्म की पंरपरा के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतिम दिन क्षमावाणी दिवस पर सभी एक-दूसरे से 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहकर क्षमा मांगते हैं। साथ ही यह भी कहा जाता है कि मैं मन, वचन, काया से जाने-अनजाने में आपका दिल दुखाया हो तो मैं आपसे हाथ जोड़कर क्षमा मांगता हूं। यह क्षमा अहिंसा और मैत्री का पर्व है। क्षमा से हृदय में शांति और मैत्री भाव उत्पन्न होता है। मन की शुद्धि से व्यक्ति का भय दूर हो जाता है।
जब शत प्रतिशत न कर पाएं न्याय
जीवन में हम अनेक व्यक्तियों के संपर्क में आते हैं। और हमें बहुत से रिश्ते निभाने पड़ते हैं। हम चाहकर भी एक ही समय में न तो सारे रिश्तों के साथ 100 प्रतिशत न्याय कर पाते हैं। ओर न ही सबको खुश रख पाते हैं। ऐसे में इस पावन पर्व पर क्षमा याचना के माध्यम से आत्मशुद्धि और मन का मैल दूर करने का बड़ा अवसर प्राप्त होता है।
क्षमा मांगने के लिए खास दिन ही क्यों?
जीवन में गलती को स्वीकार करना सबसे मुश्किल काम होता है। ऐसा करने में अक्सर व्यक्ति का अहम आड़े आता है लेकिन जब इसके लिए कोई खास दिन होता है। तो पूरा वातावरण क्षमा मांगने और क्षमा करने के लिए अनुकूल हो जाता है।
इंसान ही नहीं प्रकृति से भी मांगे माफी
जैन धर्म के इस पावन पर्व पर क्षमा केवल व्यक्ति से ही नहीं बल्कि संसार के सभी जीव-जंतुओं से माफी मांगी जाती है। साथ ही प्रकृति से भी क्षमा याचना की जाती है कि अनजाने में यदि हमने बिजली, पानी, अन्न, पुष्प, फल आदि का अनावश्यक प्रयोग या दुरुपयोग किया हो तो उसके लिए वह हमें क्षमा करे। साथ ही इस बात का संकल्प भी किया जाता है। कि आगे से ऐसा अपराध नहीं होगा।

