कृषि विज्ञान केन्द्र नौगावां में सीआरपी एवं कृषि सखियों के लिए प्राकृतिक खेती पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न
रामगढ़ (अलवर /राधेश्याम गेरा) कृषि विज्ञान केन्द्र, नौगांवां, अलवर-1 पर राष्ट्रीय मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) के अंतर्गत कृषि विभाग ,अलवर के द्वारा सी.आर.पी.एवं कृषि सखियों के लिए प्राकृतिक खेती विषय पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 8 से 12 सितम्बर, 2025 तक सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई, जिसमें मुख्य रूप से – जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत एवं दशपर्णी अर्क की तैयारी एवं उपयोग, जैविक इनपुट का महत्व एवं रासायनिक निर्भरता को कम करने के उपाय, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन हेतु सस्ते व पर्यावरण अनुकूल उपाय, किसानों तक तकनीक पहुँचाने के लिए प्रभावी प्रसार विधियाँ। कार्यक्रम में व्याख्यान, प्रायोगिक प्रदर्शन एवं खेत भ्रमण शामिल रहे, जिससे प्रतिभागियों को व्यवहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। सभी कृषि सखियों एवं सी.आर.पी. ने स्वयं प्राकृतिक घोल तैयार किए और वैज्ञानिकों से संवाद किया।
प्रशिक्षण के उद्घाटन समारोह में संयुक्त निदेशक (कृषि विस्तार) अलवर पी सी मीणा, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ॰ सुभाष चंद्र यादव, कृषि महाविद्यालय नौगांवां की अधिष्ठाता डॉ॰ सुमन खंडेलवाल, क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान नौगांवा डॉ॰ गोपाल लाल चौधरी व सहायक कृषि अधिकारी बच्चू सिंह, सहायक कृषि अधिकारी नौगाँवा धनराज सिंह राठौड़ व कृषि पर्यवेक्षक राजंती सैनी आदि उपस्थित रहे। तथा समापन सत्र में सहायक निदेशक (कृषि विस्तार) अलवर मंगतू राम ने प्रतिभागियों से अपने अनुभव साझा किए। तथा प्रशिक्षणार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गाँवों में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। इस अवसर पर डॉ. पूनम प्रजापति, विषय विशेषज्ञ (कृषि प्रसार शिक्षा) ने बताया कि प्राकृतिक खेती से न केवल लागत घटती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, किसानों की आय में वृद्धि होती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। इस प्रशिक्षण में अलवर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 68 प्रतिभागियों (सी.आर.पी. एवं कृषि सखियों) ने भाग लिया और सभी को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह प्रशिक्षण अलवर जिले में प्राकृतिक खेती आंदोलन को गति देने एवं ग्रामीण समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है