बड़े भाई के प्यार के कारण भरत ने राज्य त्यागा
खैरथल (हीरालाल भूरानी) राजर्षि अभय समाज में चल रही रामलीला के अंतर्गत आज भरत आगमन चित्रकूट में भरत मिलाप एवं खड़ायू अभिषेक तक की लीला का प्रभावी मंचन किया गया।
भरत जी को जब ननिहाल में सुमंत के द्वारा संदेश मिलता है की यथाशीघ्र आपको अयोध्या गुरु वशिष्ठ की आज्ञा अनुसार बुलाया है तो वह तुरंत अनुज शत्रुघ्न के साथ अयोध्या के लिए रवाना होते हैं अपने नाना से आज्ञा लेने के पश्चात जैसे ही वह अयोध्या में आते हैं और माता केकई से मिलते हैं तो उन्हें पता लगता है कि उनके पिता का देवलोक गमन हो गया है इस पर वह बड़े दुखी होते हैं और माता कैकई को भला बुरा कहते हैं ।वह कहते हैं की क्रूर हृदय बता राम ने तेरा क्या बिगाड़ा था तूने मेरे लिए राज्य और बड़े भाई राम के लिए वनवास मांगते तेरा हृदय टुकड़े-टुकड़े क्यों नहीं हो गया तू धर्म से गिर गई है धर्म ने तेरा त्याग कर दिया है इस प्रकार के कठोर शब्द बोलकर भरत बड़े दुखी होते हैं और वह कहते हैं कि तुम मन में यह कल्पना करो मेरे बेटा जन्मा ही नहीं मैं समझूंगा बे मां का हूं मेरे कोई माता हीनहीं।
इतना कहकर वह माता कौशल्या के पास जाते हैं और उनसे कहते हैं की माता मुझे पहचानो मैं राम नहीं भरत हूं उसी के कई का बेटा भारत जिसने आपको यह दारुण दुख दिया है फिर राज्यसभा में गुरु वशिष्ठ के समक्ष अपने मन की बात कहते हैं यह गाड़ी राम की है राम ही गाड़ी नसी होगा भारत तो उनके सेवक है और फिर वह सब चित्रकूट के लिए बड़े भाई को मनाने के लिए जाते हैं सभी माताए और प्रजावासी भी उनके साथ जाते हैं किंतु राम भारत से कहते हैं कि भाई भरत तुम जैसा भाई दुनिया में मिलना मुश्किल है मेरी आज्ञा मानो और तुम 14 वर्ष अयोध्या का राज्य करो 14 वर्ष बाद में आकर अपने राज्य ले लूंगा । इस पर भारत उनके चरण पादुका लेकर अयोध्या में आते हैं और राजगद्दी पर राम के द्वारा दी गई खड़ाऊ रखकर उनका अभिषेक करते हैं और फिर वह प्रतिज्ञा करते हैं कहते हैं मां पृथ्वी खोल गोद अपनी आता है भारत तपस्या को इसके आगे जयंत मोह एवं पंचवटी विश्राम तक की लीला का मंचन किया गया यहीं पर लीला का समापन होता है
सभी कलाकारों ने अपने-अपने पात्र के अनुरूप परिपक्व कला का परिचय देते हुए दर्शकों पर अपनी कला की गहरी छाप छोड़ी जिसे दर्शकों ने काफी सराहाआज की रामलीला के प्रायोजक निकुंज संधी निर्देशक जेएस फोर व्हील रहे जिनकी तरफ से रामलाल का आयोजन किया गया। संस्था के अध्यक्ष पंडित धर्मवीर शर्मा महामंत्री राजेंद्र प्रसाद शर्मा एवं महानिदेशक मनोज कुमार गोयल सहित समाज के पदाधिकारी स्वयंसेवक एवं कलाकारों द्वारा आए हुए अतिथियों का सम्मान किया गया।


