खैरथल-तिजारा में मिठाई उद्योग पर मिलावट का साया: त्यौहारों से पहले बढ़ी चिंता, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
त्योहारों का मौसम शुरू होते ही खैरथल-तिजारा जिले के प्रसिद्ध मिठाई उद्योग पर मिलावट का साया मंडराने लगा है। यह जिला मिठाइयों के बड़े-बड़े कारखानों के लिए जाना जाता है। यहां हर तरह की भारतीय मिठाई, खासकर अलवर मिल्क केक और कलाकंद पूरे देश में भेजे जाते हैं। इन मिठाइयों की सुगंध पूरे हिंदुस्तान में प्रसिद्ध है, लेकिन कुछ लालची कारोबारी नकली मावा, रिफाइंड तेल, और सस्ते घटकों से मिठाई बनाकर इस गौरवशाली पहचान को कलंकित कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर छापेमारी की जाती है, कुछ दुकानों के सैंपल फेल भी पाए गए हैं और जुर्माने भी लगाए गए, लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। त्योहारों के समय जब मांग बढ़ती है, तो मिलावट का कारोबार भी बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि राज्य सरकार को अब केवल सैंपल भरने या दूध नष्ट करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि ऐसे मिलावटखोरों की दुकानों के बाहर सरकार द्वारा बोर्ड लगाकर जनता को सूचित किया जाए कि यहां मिलावट पाई गई है। इससे जनता सतर्क होगी और ईमानदार व्यापारी भी राहत महसूस करेंगे। खैरथल तिजारा की जनता, व्यापारी और छात्र समुदाय एक स्वर में यही मांग कर रहे हैं कि अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, ठोस बदलाव चाहिए। मिलावटखोरी रोकने के लिए यूनियन, प्रशासन और जनता तीनों को मिलकर इस मिशन में आगे आना होगा।
ईमानदार व्यापारी भी नाराज
स्थानीय मिठाई उद्योग से जुड़े ईमानदार व्यापारी कहते हैं कि हम साफ-सुथरे वातावरण में शुद्ध मिठाई बनाते हैं। लेकिन कुछ लालची लोग नकली मावा और मिलावटी दूध से मिठाई तैयार करके पूरे जिले को बदनाम कर रहे हैं। सरकार और यूनियन दोनों को मिलकर ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए। व्यापारिक यूनियनों से भी यह मांग की जा रही है कि ऐसे कारोबारियों का सामाजिक और व्यावसायिक बहिष्कार किया जाए। दुकानदार ऐसे व्यक्तियों को सामग्री (दूध, मावा, चीनी, तेल आदि) बेचने से मना करें और कोई भी संस्था या सप्लायर ऐसे लोगों को सपोर्ट न करे।
ऐसे पहचानें नकली मावा और दूध
असली मावा हाथ में लेने पर चिकना और थोड़ा गीला महसूस होता है, जबकि नकली मावा खुरदुरा और सूखा लगता है। असली मावा की खुशबू हल्की होती है। नकली में रिफाइंड या कृत्रिम खुशबू आती है। गर्म पानी में डालने पर असली मावा घुल जाता है, जबकि नकली तैरता रहता है। दूध उबालने पर झाग बहुत ज्यादा बने और जल्दी बैठ जाए तो उसमें मिलावट की संभावना है। यदि दूध को उबालने के बाद ठंडा करने पर परत न बने तो वह संदिग्ध हो सकता है। टेस्ट स्ट्रिप (मिलावट जांच किट) से आसानी से पहचान की जा सकती है जिसे खाद्य सुरक्षा विभाग से प्राप्त किया जा सकता है।


