गंभीर नदी को बाणगंगा से जोड़ने की मांग, भरतपुर-डीग को मिले यमुना जल समझौते का पूरा लाभ : सीताराम गुप्ता
भरतपुर (विष्णु मित्तल) समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि भरतपुर एवं डीग जिलों की दीर्घकालीन जल समस्या के समाधान, किसानों की समृद्धि तथा केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण के लिए गंभीर नदी को बाणगंगा नदी से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान की जाए।
उन्होंने कहा कि श्री महावीरजी के निकट एक कैनाल का निर्माण कर गंभीर नदी के जल को बाणगंगा नदी तक पहुंचाया जा सकता है। इस परियोजना के क्रियान्वयन से वर्षों से सूखी पड़ी बाणगंगा नदी का पुनर्जीवन होगा, भू-जल स्तर में सुधार आएगा, सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा तथा केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की जल आवश्यकता भी स्थायी रूप से पूरी की जा सकेगी। इससे नदी के किनारे बसे अनेक गांवों के किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान जब पांचना बांध अपनी पूर्ण क्षमता से अधिक भर जाता है, तब अतिरिक्त पानी गंभीर नदी में छोड़ा जाता है। इसके कारण भरतपुर जिले के बयाना एवं रूपवास क्षेत्र में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे किसानों की फसलें नष्ट होती हैं तथा जन-धन की भारी हानि होती है। इसके बाद यही अतिरिक्त पानी उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर यमुना नदी में मिल जाता है, जिससे राजस्थान को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि श्री महावीरजी के पास प्रस्तावित कैनाल का निर्माण कर दिया जाए तो पांचना बांध का अतिरिक्त जल बाणगंगा नदी में प्रवाहित किया जा सकेगा। इससे एक ओर बाढ़ की समस्या एवं जन-धन की हानि में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर यह जल सिंचाई, भू-जल पुनर्भरण तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव को लेकर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा भी भी सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।
गुप्ता ने यह भी मांग की है कि पांचना बांध के निर्माण के बाद आज तक उसकी वैज्ञानिक ढंग से सिल्ट सफाई नहीं कराई गई है। वर्तमान में बांध के तल में लगभग 20 फीट तक गाद (सिल्ट) जमा हो चुकी है, जिसके कारण उसकी जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय कमी आई है। यदि सिल्ट हटाकर बांध की सफाई कराई जाए तो उसकी मूल भंडारण क्षमता पुनः स्थापित हो सकेगी तथा भविष्य में अधिक मात्रा में वर्षा जल का संचयन संभव होगा। साथ ही उन्होंने पांचना बांध के जल में भरतपुर जिले का वैधानिक एवं न्यायसंगत हिस्सा निर्धारित करने की भी मांग की।
उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी रामजल सेतु लिंक परियोजना के प्रथम चरण में गंभीर एवं बाणगंगा नदियों को जल उपलब्ध कराने का कार्य शामिल किया जाए, ताकि पूर्वी राजस्थान के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को स्थायी जल सुरक्षा मिल सके।
गुप्ता ने शेखावाटी क्षेत्र को यमुना जल उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने मांग की है कि वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते के अनुसार डीग एवं भरतपुर जिलों को निर्धारित 481 क्यूसेक जल की नियमित एवं पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में आगरा कैनाल के माध्यम से मिलने वाले पानी का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में अवैध पम्पिंग के कारण बीच रास्ते में ही उपयोग कर लिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप भरतपुर एवं डीग जिलों को उनका पूरा जल अधिकार प्राप्त नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि यदि यमुना जल समझौते के अनुरूप निर्धारित मात्रा में जल उपलब्ध कराया जाए तथा गंभीर-बाणगंगा लिंक परियोजना को शीघ्र लागू किया जाए, तो भरतपुर एवं डीग जिलों में कृषि उत्पादन कई गुना बढ़ेगा, भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल संकट का स्थायी समाधान मिलेगा, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को नियमित जल उपलब्ध होगा तथा पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास को नई गति मिलेगी।

