पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ धोखाधड़ी के पर्याप्त आधार; दिल्ली की अदालत ने रद्द किया मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला

Nov 13, 2025 - 11:57
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पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ धोखाधड़ी के पर्याप्त आधार; दिल्ली की अदालत ने रद्द किया मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला
पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ धोखाधड़ी के पर्याप्त आधार; दिल्ली की अदालत ने रद्द किया मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला

दिल्ली की एक अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उसने पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया था। 
इस आदेश को रद्द करते हुए अदालत ने कहा कि उनके (जितेंद्र सिंह) खिलाफ आपराधिक विश्वासघात के अपराध के लिए केस चलाने वास्ते प्रथम दृष्टया आधार मौजूद हैं। यह मामला MF हुसैन की करोड़ों रुपए की पेंटिंग से जुड़ा है, जिसे जितेंद्र सिंह ने अपनी मां से उधार लिया था, लेकिन उसे वापस नहीं लौटाया। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता की मां द्वारा सिंह को भेजे गए एक मैसेज से यह अनुमान लगा लिया कि पेंटिंग उपहार में दी गई थी। जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था।
 सिंह ने अप्रैल 2014 में अपनी मां से 1 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की एमएफ हुसैन की एक पेंटिंग उधार ली थी, लेकिन उसे वापस नहीं किया। साल 2017 में, पूर्व मंत्री ने दावा किया कि वह पेंटिंग उनसे गुम हो गई है और वह उसे ढूंढ नहीं पा रहे हैं।
इस मामले में 11 नवंबर को दिए अपने आदेश में अदालत ने कहा, 'रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि संबंधित पेंटिंग अप्रैल 2014 में प्रतिवादी 2 (भंवर जितेंद्र सिंह) को केवल एक सीमित उद्देश्य के लिए दी गई थी। जिसके अनुसार उन्हें यह पेंटिंग सिर्फ अपनी पत्नी को दिखाने और इसे खरीदने के बारे में विचार करने के लिए दी गई थी। यह पूरी गतिविधि सद्भावनापूर्वक और स्वामित्व के किसी भी हस्तांतरण के बिना की गई थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बार-बार मौखिक और लिखित अनुरोध के बावजूद सिंह द्वारा पेंटिंग वापस ना करना, झूठे आश्वासन देना और अंततः उसे वापस करने से इनकार करने के बाद का आचरण, स्पष्ट रूप से सौंपी गई संपत्ति को बेईमानी से रखने और उसके दुरुपयोग को दर्शाता है ।और यह आईपीसी की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात के लिए जरूरी अपराध को पूरा करता है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता की मां द्वारा सिंह को भेजे गए एक एसएमएस पर गलती से भरोसा करके यह अनुमान लगाया कि पेंटिंग उपहार में दी गई थी।
अदालत ने कहा कि जब पूरे संवाद क्रम को एक साथ पढ़ा जाता है, तो निचली (मजिस्ट्रियल) अदालत द्वारा निकाला गया यह अनुमान कि पेंटिंग उपहार में दी गई थी, स्पष्ट रूप से टिकने योग्य नहीं है। अदालत ने कहा कि संदेशों के लहजे और भाषा से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि शिकायतकर्ता की मां बार-बार सिंह से पेंटिंग वापस करने का अनुरोध कर रही थीं और उनके लगातार जवाब न देने पर दुख व्यक्त कर रही थीं।
अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कहा, 'इस प्रकार, रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया प्रतिवादी 2 (सिंह) के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 के तहत दंडनीय अपराध के लिए आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार प्रकट करती है।' अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए उसे कानून के अनुसार आगे बढ़ने और उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया। अदालत ने शिकायतकर्ता और सिंह को 25 नवंबर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का निर्देश दिया।
 भंवर जितेंद्र सिंह राजस्थान की अलवर सीट से सांसद रह चुके हैं। उन्होंने साल 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। वह भारत सरकार के पूर्व युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पूर्व रक्षा राज्य मंत्री हैं। उन्होंने 28 अक्टूबर 2012 को यह पदभार ग्रहण किया। इससे पहले, सिंह भारत सरकार के गृह राज्य मंत्री थे, यह पद उन्होंने जुलाई 2011 में ग्रहण किया था। फिलहाल सिंह कांग्रेस महासचिव, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के असम प्रभारी और कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य हैं।

  • कमलेश जैन

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