भरतपुर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) महाराजा सूरजमल स्मृति समारोह के दो दिवसीय आयोजन का भव्य शुभारंभ बुधवार को केवलादेव पक्षी उद्यान के द्वार पर लोक कलाकरों की नृत्य प्रस्तति के साथ किया गया। जनकल्याण के लिये किला स्थित गायत्री शक्तिपीठ में पवित्र यज्ञ कर देश-प्रदेश में शांति, समृद्धि एवं खुशहाली के लिए मंत्रोचार के साथ शहर के गणमान्य नागरिकों ने यज्ञ में आहुती दी।
लोक कलाकारों की प्रस्तुति को देशी-विदेशी पर्यटकों ने सराहा तथा कलाकरों के साथ फोटो खिंचवाये, शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी भागीदारी निभाई। जिला कलक्टर कमर चौधरी, गायत्री शक्तिपीठ के सदस्यों, अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिकों ने यज्ञ में आहुति देकर सम्पूर्ण विश्व में शांति एवं खुशहाली की कामना की।
रंग-बिरंगी पोषाक पहनकर इठलाये नन्हे कदम-
कार्यक्रमों की श्रंखला में राजकीय संग्राहलय में राधा-कृष्ण एवं महापुरूष पोशाक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें भगवान श्रीकृष्ण-राधा के रूप धरकर नन्हे बच्चों ने इठलाते हुए कदमताल किया। ऐतिहासिक महापुरूषों, स्वतंत्रता सेनानियों जैसी पोषाक पहनकर बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन किया।
सेंड आर्ट प्रदर्शनी में उकेरा महाराजा सूरजमल का चित्र-
किला स्थित किशोरी महल के पास में सेंड आर्ट के प्रसिद्ध कलाकार अजय रावत ने महाराजा सूरजमल, लोहागढ किला एवं केवलादेव अभ्यारण के चित्र का हुबहू चित्रांकन किया। बालू रेत पर उकेरे गये चित्र को देखकर हर वर्ग के नागरिकों ने सराहना की और अजय रावत द्वारा मौके पर सेंड स्टोन की प्रदर्शनी भी लगाई।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम -
टाउन हॉल में स्कूली विद्यार्थियों द्वारा चित्रकला , मेहंदी एवं रंगोली प्रतियोगिता में 8 ग्रुपों ने भाग लिया गया। जिसमें ग्रुप संख्या 7 की प्रतिभागी प्रिया डागुर, हिमेश्वरी एवं दीक्षा प्रथम स्थान, ग्रुप संख्या 4 की प्रतिभागी हर्षित तिवारी, प्रतीक एवं स्पर्श धनगर ने द्वितीय व ग्रुप संख्या एक के विशाल, सुन्दर व भूमि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार क्विज प्रतियोगिता में 7 ग्रुपों ने भाग लिया जिसमें ग्रुप प्रथम की चेतना सिंसोदिया व क्षमा यादव प्रथम, ग्रुप द्वितीय की रचना गुर्जर व मुस्कान द्वितीय स्थान पर रहे तथा ग्रुप संख्या 7 की अनुष्का व दर्शिता शर्मा तृतीय स्थान पर रहे।
महाराजा सूरजमल के बलिदान को याद किया -
लोहागढ किला स्थित टाउन हॉल में महाराजा सूरजमल जी के योगदान पर आधारित वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें उनके द्वारा देश-धर्म की रक्षा के लिये किये गये त्याग, युद्ध कौशल, शौर्य, पराक्रम की चर्चा की गई। युवाओं को महाराजा सूरजमल के बलिदान से रूबरू कराते हुये उनके आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया गया। इतिहासकारों एवं प्रबुद्धजनों में गिरधारी तिवारी, डॉ. प्रेमसिंह कुन्तल, सुधीरपाल सिंह, अशोक सिंह धाकरे, श्यामवीर सिंह जघीना, डॉ. अशोक गुप्ता ने महाराजा सूरजमल के शौर्य, भरतपुर के स्थापत्य के रूप में योगदान पर प्रकाश डाला गया। साहित्यकार नरेन्द्र निर्मल में संगोष्ठी का संचालन किया।