लक्ष्मणगढ़ में गाड़ियां लोहार समाज का खत्म हुआ वनवास, नगरपालिका ने उपलब्ध कराए आवास हेतु प्लॉट
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) महाराणा प्रताप के अनुयायी बताए जाने वाले घुमंतू व बेघर गाड़िया लोहार समाज को नगर पालिका प्रशासन द्वारा सेंढ माता मंदिर के जाने वाले रास्ते पर जहां पूर्व में साटा जाति को जगह आलोट की गई थी उसी के पास आज गाड़ियां लोहार को जगह का चिन्हित कारण कर सौंप दी गई है। वर्तमान में कठूमर रोड पंचायत समिति के पास सड़क किनारे बसे हुए होने से भारी वाहनों का आवागमन बना रहता है इससे दुर्घटना होने का अंदेशा बना हुआ था। ये लोग सड़कों के किनारे झोपड़ी या बैलगाड़ी में परिवार सहित रहकर लोहे के कृषि उपकरण व बर्तन आदि बनाने का काम करते हैं। समाजसेवी विक्रम नरूका ने इस जाति के लिए प्रशासन को अवगत कराया एवं समय-समय पर उनकी लिए जगह के लिए मांग की गई। इस समाज के पुनर्वास की मांग करने वाले विक्रम नरूका का कहना है कि प्रशासन ने मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीरता दिखाते हुए उनको पूरा भरोसा दिलाया था।
विक्रम सिंह नरूका ने बताया कि इस समाज के लोग कस्बे में सड़क किनारे बैलगाड़ी या झोपड़ी डालकर लोहे के कृषि यंत्र और बर्तन आदि बनाने का काम करते देखे गए। इनके विषय में मान्यता है कि इनके पूर्वज महाराणा प्रताप के अनुयायी रहे। वे लड़ाई लड़ने के साथ-साथ उनके लिए हथियार बनाने का काम करते थे। अब आजाद भारत पर हमारा अपना शासन है। इसलिए अब इन्हें भी सभी नागरिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। इनको भी राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, आयुष्मान कार्ड देने के साथ बच्चों को शिक्षा और आवास की व्यवस्था की जाए। उन्होंने गाड़ियां लोहार समाज को सभी नागरिक सुविधाएं दिए जाने का अनुरोध किया है। ताकि ये लोग भी विकास की मुख्यधारा में आकर बेहतर जीवन यापन कर सकें।


