एनसीआर में शामिल होने के बावजूद खैरथल शहर आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित; बुनियादी जरुरतों का अभाव
खैरथल (हीरालाल भूरानी ) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल होने के बाद भी खैरथल शहर आज तक मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। एनसीआर का दर्जा मिलने से जहां क्षेत्र के तेज विकास, बेहतर परिवहन, रोजगार के अवसर और आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद जगी थी, वहीं हकीकत इससे कोसों दूर नजर आ रही है। शहरवासी आज भी रेल, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे विकट समस्या पर्यावरण की पाबंदी की है। बार बार ग्रेप की पाबंदी का दंश झेलना पड़ता है।
खैरथल जैसे महत्वपूर्ण शहर का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि यहां आज तक यहां से लम्बी दूरी की रेल सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। खैरथल के स्टेशन का विकास तो हुआ लेकिन आज भी इससे व्यापार, उद्योग और आम यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। मुंबई, कोलकाता सहित अन्य प्रमुख शहरों की यात्रा के लिए लोगों को दिल्ली या जयपुर के रेलवे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। सड़क परिवहन की स्थिति भी चिंताजनक है।
प्रमुख मार्गो की हालत जर्जर बनी हुई है। जगह-जगह गड्ढे, अधूरे ओवरब्रिज और टूटे सड़क क्रॉसिंग दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। एनसीआर क्षेत्र में होने के बावजूद खैरथल को अब तक न तो कोई हाई स्पीड कनेक्टिविटी मिल सकी है और न ही सुचारु सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित हो पाई है। जिला हेडक्वाटर पर बस डिपो नहीं होना दुर्भाग्य की बात है ।संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी नहीं हुई बढ़ोतरी
स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो जिले का नवगठन होने के बावजूद यहां के सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक मशीनों और पर्याप्त स्टाफ का अभाव बना हुआ है। गंभीर मरीजों को आज भी अलवर, गुरुग्राम या जयपुर रेफर किया जाता हैं, जिससे कई बार स्थिति जानलेवा हो जाती है। एनसीआर जैसे शिक्षा और रोजगार में भी पिछड़ा जिला
शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी खैरथल अपेक्षित प्रगति से काफी पीछे है। न तो यहां उच्च शिक्षा के बड़े संस्थान है और न ही उद्योग-धंधों का समुचित विकास हो पाया है।
परिणामस्वरूप युवाओं को रोजगार के लिए बाहर पलायन करना पड़ता है। शहरवासियों का कहना है कि एनसीआर में शामिल होने का लाभ कागजों तक ही सीमित रह गया है। सरकार और संबंधित विभागों ने यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो खैरथल का विकास केवल घोषणाओं तक ही सिमट कर रह जाएगा। आमजन अब मांग कर रहा है किं खैरथल को वास्तविक अर्थों में एनसीआर का लाभ मिले और यहां रेल सहित सभी मूलभूत सुविधाओं का शीघ्र विकास किया जाए।
कई कॉलोनियों में नहीं पहुंच रहा स्वच्छ पानी
पेयजल और स्वच्छता भी खैरथल की बड़ी समस्या है। कई कॉलोनियों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। गर्मियों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। वहीं, नालियों की सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी बदहाल है, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है।


