मौनी अमावस्या पर लोहार्गल धाम के सूर्य कुंड में हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव ) शेखावाटी के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल लोहार्गल धाम में माघ मास की मौनी अमावस्या पर सूर्य कुंड में हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। सूर्यकुंड में श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद विभिन्न मंदिरों में भगवान के दर्शन किए वहीं विभिन्न स्थानों पर दान पुण्य भी किया। सिद्ध पीठ वेंकटेश बालाजी मठ के पीठाधीश्वर स्वामी अश्विनी आचार्य महाराज ने मौनी अमावस्या का महत्व बताया कि माघ मास की मौनी अमावस्या का बहुत महत्व है, क्योंकि इस दिन मौन रहकर पवित्र नदियों (जैसे संगम) में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है ।पितरों को शांति मिलती है, मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और आत्मबल बढ़ता है; यह दिन तप, दान और पितृ दोष निवारण के लिए विशेष फलदायी माना जाता है, जिससे व्यक्ति को स्वास्थ्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है। तीर्थ में जाकर स्नान करना मंदिर में जाकर पूजा कर दान पुण्य करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पवित्र स्नान: इस दिन मौन रहकर पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा-यमुना-सरस्वती संगम में स्नान करने से असीम पुण्य मिलता है।
मौन व्रत का लाभ: मौन व्रत रखने से मन शांत होता है, चंचलता कम होती है, आत्म-चिंतन बढ़ता है और वाणी की शुद्धि होती है, जिससे आध्यात्मिक शक्तियाँ बढ़ती हैं।
पितरों का आशीर्वाद: यह दिन पितरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है; तर्पण, दान और मौन व्रत से पितृ दोष शांत होता है और पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।
स्वास्थ्य और ज्ञान: मानसिक समस्याओं और भय से मुक्ति मिलती है, जिससे मानसिक संतुलन और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
योगिक लाभ: यह दिन योग पर आधारित महाव्रत है, जिसमें सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं, जिससे यह ऊर्जावान और शक्तिशाली अवसर बन जाता है।
दान का महत्व: इस दिन गाय, कंबल, उड़द दाल, तिल, अन्न आदि का दान करना शुभ माना जाता है, जिससे शनि-राहु-केतु दोष भी कम होते हैं।
क्या करें?
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें और मौन व्रत धारण करें।
- पवित्र नदी में स्नान करें (या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें)।
- तर्पण और पिंडदान करें।
- ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
- मौन रहकर जप, ध्यान और पूजा करें। लोहार्गल के वेंकटेश बालाजी मंदिर सूर्य मंदिर व विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओ ने दर्शन कर स्वामी अश्विनी आचार्य महाराज से आशीर्वाद लिया ।