श्री श्याम महोत्सव से हलैना बना खाटूश्याम धाम; श्रीराम कथा व श्री लक्ष्मीनारायण यज्ञ में उमड रहा जन सैलाब
हलैना (विष्णु मित्तल) श्री श्याम सखा मण्डल एवं श्रीश्याम प्रेमियों के द्वारा कस्वा हलैना के प्राचीन श्री वीर हनुमान मन्दिर स्थित श्री श्याम मन्दिर परखा मनाए जा रहे तृतीय खाटूश्याम महोत्सव के तहत श्रीराम कथा एवं 11 कुण्डीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन जारी है, दूसरे दिन तक महायज्ञ में वेदमन्त्रों की 21 हजार आहुतियां पूर्ण हो चुकी और 2 फरवरी तक सवा लाख आहुतियां होगी। श्रीराम कथा एवं महायज्ञ में कस्वा हलैना सहित आसपास के गांव सहित महवा, नदबई, वैर, खेरलीगंज, भुसावर, भरतपुर, बयाना आदि स्थानों से भारी सख्यां में श्रद्वालु उमड रहे है और 24 से 26 जनवरी तक 51 हजार से अधिक श्रद्वालुंओ ने खाटूश्याम बाबा के दर्शन कर लिए और दर्शन करने का क्रम जारी है। मण्डल के संरक्षक ओमप्रकाश गुप्ता, द्वारिका प्रसाद मास्टर, रवि गोयल, अशोक गर्ग वैर वाले एवं सोमेश्वर पहलवान ने बताया अयोध्या के सन्त अवध बिहारी जी महाराज, श्याम मन्दिर भरतपुर के महन्त रोहित महाराज एवं पण्डित पुष्पेन्द्र शर्मा के सानिध्यं में 24 जनवरी से तृतीय खाटूश्याम महोत्सव मनाया जा रहा है।
वृन्दावन धाम के श्रीराम कथा वाचक गोविन्द भईया महाराज ने रामायण ग्रन्थ के तहत भगवान शिव-पार्वती, भगवान श्रीराम सहित अनेक धार्मिक प्रंसग सुनाए। वही मध्यप्रदेश प्रान्त के ममलेश्वर क्षेत्र के ओकाश्वेर धाम के यज्ञाचार्य सुदर्शन शर्मा एवं उनके साथ आए अन्य विद्वानों के द्वारा 25 जनवरी से 11 कुण्डीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ कराया जा रहा है और 25 जनवरी से 2 फरवरी तक सवा लाख मंत्रों की आहुतियां होगी। दूसरे दिन 21 हजार आहुतियां पूर्ण हो गई। उन्होने बताया कि श्री खाटूश्याम महोत्सव-26 में उमड रहे जन सैलाव से कस्वा हलैना खाटूश्याम धाम बना हुआ है। इस महोत्सव में भरतपुर, आगरा, दौसा, अलवर, जयपुर, करौली, धौलपुर, मथुरा, सवाई माधोपुर जिले सहित दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार , उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के श्रीश्याम प्रेमी शामिल हो रहे है। इस कार्यक्रम में श्याम बाबा के सेवक रवि गोयल, सोमेश्वर पहलवान, अशोक गर्ग वैर वाले, राजू यादव, अशोक गोयल दवा वाले, अजय सिंह, होलू जाट, लखनलाल, महेन्द्र मास्टर, गीता देवी, सुनीता गुप्ता, पवन शर्मा आदि ने कथा वाचक एवं अन्य स्थान से आए पण्डित व सन्तों का सम्मान किया।