समृद्ध भारत अभियान द्वारा विश्व मधुमक्खी दिवस पर जयपुर में लगाई प्रदर्शनी; मधुमक्खी पालन एवं प्रबन्धन की दी जानकारी
भरतपुर (विष्णु मित्तल) जयपुर में आयोजित हुए पक्षी मेले के दौरान समृद्ध भारत अभियान संस्था द्वारा मधुमक्खियों के जीवन चक्र, शहद एकत्रीकरण व मधुमक्खियों की पर-परागण के माध्यम से कृषि उत्पादन में वृद्धि पर प्रदर्शनी लगाई गई। जिसमें बताया गया कि कम लागत में अधिक लाभ देने वाला मधुमक्खी पालन का व्यवसाय युवाओं को अधिक रोजगार देने वाला है।
मेले में शामिल हुए विद्यार्थियों, पक्षी प्रेमियों, विषय विशेषज्ञों व युवाओं को मधुमक्खी पालन विषय विशेषज्ञ भीम सिंह ने बताया कि कम लागत एवं अधिक लाभ देने वाले इस व्यवसाय को भूमिहीन किसान, बेरोजगार युवक आसानी से कर सकते हैं। मधुमक्खियों द्वारा उत्पादित शहद की देश-विदेश में भारी मांग है। कई देशों में तो शहद का उपयोग नाश्ते में किया जाता है क्योंकि शहद में कई गुणकारी तत्व होते हैं जो मानव शरीर को निरोगी बनाने के साथ बेहतर जीवन क्रिया-कलापों में सहायक होते हैं। भीम सिंह ने बताया कि भारत में इटालियन मधुमक्खी एपिस मेलीफेरा का पालन किया जाता है। इस प्रजाति की रानी मक्खी में अण्डे देने की क्षमता अधिक होती है। इस प्रजाति की मधुमक्खी के एक बॉक्स से 60 से 80 किलोग्राम शहद आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ भीम सिंह ने बताया कि सरसों उत्पादक जिलों में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय आसानी से किया जा सकता है क्योंकि मधुमक्खियाँ पर-परागण के माध्यम से सरसों का उत्पादन 20 से 25 प्रतिशत बढ़ा देती हैं। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन एक ईको-फ्रेंडली व्यवसाय है जो किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाता है। इसे ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग के रूप में संचालित किया जा सकता है। इस व्यवसाय में शहद के अलावा मोम सहित अन्य उत्पाद प्राप्त किये जा सकते हैं। इसके अलावा मधुमक्खियों की संख्या बढ़ने पर अलग बॉक्सों में रखकर इन्हें अन्य मधुमक्खी पालकों को विक्रय किया जा सकता है।
भीम सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य व केंद्र सरकार अनुदान भी प्रदान करती है। मधुमक्खियों को मौसम के अनुसार पराग मुहैया कराने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने के दौरान सरकार द्वारा आवागमन सुविधा भी प्रदान की जाती है। पक्षी मेले के आयोजित कार्यशाला में विश्व वन्यजीव निधि (डब्ल्यू डब्ल्यू एफ) के राहुल शाह, वन्यजीव अनुसंधानकर्ता डॉ०प्राची मेहता, पदमश्री अवार्डी अनूपशाह नैनीताल, उदयपुर के डॉ० सतीश कुमार शर्मा, डॉ०असद आर रहमानी, रवि सिंह, कुं. राजपाल सिंह, अरुण प्रसाद, राहुल भटनागर, विक्रम सिंह, समृद्ध भारत अभियान के विष्णु मित्तल आदि ने अपने विचार व्यक्त किये !


