जयपुर में हुआ विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव; दाम्पत्य जीवन में जब तक समर्पण और विश्वास है तब तक जीवन आनंद प्रेममय - आचार्य प्रसन्न सागर
जयपुर (कमलेश जैन) दाम्पत्य जीवन में जब तक समर्पण और विश्वास है तब तक जीवन आनंद प्रेममय है ,जहा विश्वास कमज़ोर हुआ और तर्क-कुतर्क आपसी रिश्ते में पैदा हुये बस वही से रिश्ता डेमेज होने लगता है।
दाम्पत्य जीवन का आनंद तो समर्पण और विश्वास से ही चलता है ।दाम्पत्य जीवन के सुख शान्ति आनंद प्रेम के लिए सोच और पानी को साफ सुथरा होना चाहिए।
ये उदगार साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने मानसरोवर के शिप्रा पथ स्थित हाऊसिंग बोर्ड ग्राऊंड पर रविवार को हुए विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव में सैकड़ों दम्पतियों को सम्बोधन करते हुए कहे।
आदर्शमयी संस्कार कराए गये।
अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज जयपुर प्रवास समिति के अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन एवं महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि इस दौरान आयोजित धर्म सभा में आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने युवाओं को आव्हान किया कि भगवान महावीर द्वारा दिये गये उपदेशों के अनुसरण में धर्म की ध्वजा सदैव फैलाते रहे। जब पति पत्नी में से एक को क्रोध आये तो दूसरे को चुप रहना चाहिए। आचार्य शशांक सागर मुनिराज ने सभी दम्पतियों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके दीर्घायु और सुखद जीवन की कामना की।
इससे पूर्व सभी दम्पतियों को माला, दीपक, सुपारी, हल्दी गांठ, नारियल, पान पत्ता, पीले चावल, पीली सरसों, लौंग, कलश सहित मंत्रों के साथ धार्मिक आदर्शमयी संस्कार करवाये गये। गरजौडा बांधा जाकर वरमाल करवाई गई। आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए महिलाओं को पैरो में पायल व बिछियां, गले में मंगल सूत्र, हाथों में कंगन, आंखों में काजल, मांग में कुमकुम सिन्दूर को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि सुहाग की अमरता व सफलता के लिए मांग में सिन्दूर जरुर लगाना चाहिए। इस मौके पर सुखी जीवन के लिए सभी दम्पतियों को सात संकल्प दिलाए।
कोषाध्यक्ष कैलाश चन्द छाबड़ा ने बताया किइस महोत्सव में इन दम्पति सदस्यों को आदर्शमयी वैवाहिक जीवन एवं संयम और संस्कार युक्त आचरण के बारे में बताते हुए जीवन में सामंजस्य एवं समन्वय स्थापित कर आपसी रिश्ते में मजबूती एवं सफलता के बिन्दु बताए गए
तीनों आचार्य ससंघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य बा.ब्र. तरुण भैय्या इन्दौर के निर्देशन में श्री जी के अभिषेक के बाद में विश्व में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए शांतिधारा की गई। पहली बार तीन आचार्य संघों के सानिध्य में निकली श्री जी की रथयात्रा दोपहर में 1. 15 बजे हाऊसिंग बोर्ड ग्राऊंड शिप्रा पथ से मीरामार्ग दिगम्बर जैन मंदिर तक श्री जी की विशाल रथयात्रा निकाली गई । सभी 12 तीर्थंकरों की प्रतिमाओं को रथों में विराजमान कर मीरामार्ग दिगम्बर जैन मंदिर ले जाया गया । तत्पश्चात प्रतिमाओं को जयकारों के बीच मंदिर जी में वेदी में विराजमान किया गया।
सायंकाल 4.00 बजे से भक्ति भाव से गुरु पूजा तथा प्रतिक्रमण किया गया। सायंकाल 6.00 बजे से गुरु भक्ति एवं आनन्द यात्रा का भव्य आयोजन हुआ जिसमें आचार्य श्री ने जीवन में सफलता प्राप्त करने का मंत्र बताया। पंच परमेष्ठी, आचार्य प्रसन्न सागर महाराज आचार्य की 108 दीपकों से भक्तिमय आरती की गई।
प्राप्त जानकारी अनुसार पूज्य आचार्य श्री सोमवार 2 फरवरी को प्रात: 8 बजे मीरामार्ग आदिनाथ भवन से आचार्य संघ मंगल विहार कर श्यामनगर पहुंचेगा जहां आहार चर्या सहित अन्य आयोजन होगें। आचार्य श्री ससंघ का 3 फरवरी को वैशाली नगर , 4 को झोटवाड़ा, 5 को मंगल विहार, 6 को थड़ी मार्केट, 7 फरवरी को सिद्धार्थ नगर में प्रवास रहेगा।