बाघराज की पाल और किला बना असामाजिक तत्वों का अड्डा
राजगढ (अलवर/ अनिल गुप्ता) कस्बे के बारलाबास मौहल्ले समीप स्थित बाघराज की पाल एवं प्राचीन किला इन दिनों असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है।
नागरकों ने बताया की सांझ ढलते ही यहां नशाखोरों और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण बन जाता है।बाघराज की पाल एक धार्मिक स्थल है, जहां प्रतिदिन शाम के समय महिलाओं और पुरुषों का आवागमन रहता है। श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, लेकिन असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के कारण लोगों को भारी असुविधा और डर का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि पाल पर स्थित स्कूल की दीवारों के पीछे कुछ लोग खुलेआम नशा करते हैं। वहीं किले परिसर में भी संदिग्ध गतिविधियां जारी हैं, जिन पर किसी प्रकार की रोक-टोक नजर नहीं आ रही। पूर्व में यहां पुलिस थाना संचालित होने से ऐसी गतिविधियां नहीं होती थीं, लेकिन थाना बाईपास पर स्थानांतरित होने के बाद से असामाजिक तत्वों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। इन परिस्थितियों के चलते बाघराज बाबा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी देखी जा रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राजगढ़ के सचिव कामरेड मनोज कुमार बोहरा एडवोकेट ने पुलिस व प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त शुरू की जाए और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि आमजन में व्याप्त भय दूर हो सके और धार्मिक स्थल की गरिमा बनी रहे।