पादरली में आचार्य गुणरत्नसूरीश्वर की मूर्ति की प्रतिष्ठा में गूजें जयकारें

Mar 4, 2026 - 20:13
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पादरली में आचार्य गुणरत्नसूरीश्वर की मूर्ति की प्रतिष्ठा में गूजें जयकारें

तखतगढ़ / बरकत खा : श्री पादरली जैन संघ के तत्वावधान में श्री शंखेश्वर पार्श्व जितेंद्र गुणरत्नसूरी जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा गुरुमूर्ति की प्रतिष्ठा में जयकारें गूजें।पादरली के चौक में नूतन मंदिर बनाकर शंखेश्वर पार्श्वनाथ व पादरली नंदन मेवाड़ देशोधारक जितेन्द्रसूरी की 9 साल पूर्व जिनके हाथ से प्रतिष्ठा हुई थी ऐसे उनके पट्टधर व लघु भ्राता दीक्षा दानेश्वरी गुणरत्नसूरीश्वर की गुरुमूर्ति की प्रतिष्ठा हेतु उनके लाडले शिष्यरत्न व एवं उनके भानेज आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वर के 9साल बाद आगमन पर अंबाजी मंदिर से भव्य सामैया हुआ । बहनों ने मंगल कलश लेकर परीक्रमा आदि एवं गहुली निकलकर अक्षत से वधामना किया । साथ में पन्यास जितरत्न विजय आदि साधु भगवंत पधारे । पादरली गौरव तपस्विनी साध्वी श्री पुष्पलता की शिष्या 498साध्वी के गुरु माता प्रवतीनि साध्वी श्री पुण्यरेखा श्री जी की शिष्या पादरली की कुलदीपका साध्वी श्री हितेशरेखा श्री जी आदि साध्वी भगवंत भी पधारे । सामैया के बाद गुरु मूर्ति पांच अभिषेक व दोपहर को गांव सांझी सम्पन्न हुई । 4 मार्च को प्रात ओम पुण्याहं पुण्याहं प्रियंताम प्रियंताम के उच्चार के साथ पादरलीनंदन गुरुदेव श्री गुणरत्नसूरिश्वर महाराज की प्राण प्रतिष्ठा के बाद गुरु मंदिर में विराजित किए गए ।
चढ़ावे लेने वाले एवं ग्रामवासियों श्री गुरुदेव के प्रति जबरदस्त आस्था दिखी है। पादरली में 94 वर्ष पहले हीराचंद जेरूपचंद जी साकरीया की पत्नी मनु देवी ने  बेटे  को जन्म दिया। नाम रखा गुलाब (गणेशमल) । मुंबई में मैट्रिक तक पढ़ाई की।
 सिनेमा स्टार शशि कपूर 4 साल तक सह पाटी रहे । 21 साल की उम्र में दीक्षा ली । पूज्य प्रेमसूरी के शिष्य पूज्य भुवनभानु सूरी के शिष्य मुनि जितेंद्र विजय के शिष्य बने मुनि गुणरत्न विजयजी नाम रखा गया।60000 श्लोक प्रमाण खवगसेढ़ी आदि ग्रंथ रचे । जो बर्लिन यूनिवर्सिटी  व अमेरिकन कांग्रेस लाइब्रेरी में पहुंचे । 14 साल अखंड गुरु सेवा कर दादा गुरु श्री प्रेमसूरीश्वर के विशिष्ट कृपा पात्र बने । पूज्य प्रेमसूरीश्वरजी का ओघा मिला ।451मुमुक्षुओ को रजोहरण देकर इंडिया बुक रिकॉर्ड व एशिया बुक रिकॉर्ड  में नाम दर्ज हुआ । हर कदम पर इतिहास रचा । हिंदी गुजराती अंग्रेजी के चोपन पुस्तके लिखी ।आज  से 6 साल पूर्व सूरत में अंतिम श्वास ली । वेसु महाविदेह धाम मैं समाधि मंदिर बना है। जहा हजारों भक्त जाकर शीश नवाते हैं । जन्मभूमि पादरली में भी गुरु मंदिर बना हे । 4 मार्च को गुरु मूर्ति की प्रतिष्ठा हुई ।गुरुवार को पादरली के महुड़ी नगर में श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय की 25 वीं ध्वजा चढ़ाई गई | पूज्य गुरुदेव श्री अब विहार कर राजिका वास जाएगे जहाँ  12मार्च को गुरु मूर्ति की प्रतिष्ठा करवाएगें।

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