गायत्री नगर में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी का महामस्तकाभिषेक महोत्सव हुआ भक्ति के साथ संपन्न
जयपुर (कमलेश जैन) महावीर तपोभूमि उज्जैन व गोलोक धाम के प्रणेता वात्सल्य रत्न आचार्य प्रज्ञा सागर जी महाराज के 41 वें गृह त्याग दिवस के अवसर पर श्री दिगंबर जैन मंदिर महारानी फार्म गायत्री नगर में 11 अप्रैल को प्रातः 7:00बजे से आचार्य श्री की प्रेरणा , आशीर्वाद ससंघ सानिध्य में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान मेंमूल नायक प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी का 170 कलशों से महामस्तिकाभिषेक महोत्सव संपन्न बडे ही भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ।
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने अवगत कराया की सर्वप्रथम मन्दिर जी में नित्य अभिषेक हुए, तत्पश्चात मनोज बोहरा परिवार की ओर से गुरुदेव आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया गया व शास्त्र भेंट किए।
प्रथम अभिषेक करने का सोभाग्य सोधर्म इन्द्र बनकर अनिल गोधा परिवार को प्राप्त हुआ, शांति धारा करने का सोभाग्य मिला कैलाश छाबडा परिवार व गुन्जन जैन खांदू कालोनी , बांसवाड़ा वाले परिवार को मिला।
आचार्य श्री ने वार्षिकोत्सव पर णमोकार महामंत्र 24 घंटे का अखंड सामूहिक पाठ करायें जाने का आव्हान किया। आचार्य श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि द्वितीय तीर्थंकर भगवान अजितनाथ के समय कर्म भूमियों में एक साथ 170 तीर्थंकर हुए, आज सर्वार्थ सिद्धि योग है इस कारण 170 कलशों से इस मन्दिर जी में प्रथम बार महामस्तिकाभिषेक कराया है,अब भगवान ऋषभदेव जी के जन्म कल्याणक चैत्र बदी नवमी को प्रतिवर्ष महामस्तिकाभिषेक कराया जायेगा।
सभा का संचालन मंदिर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अरुण शाह ने किया और यह ऐतिहासिक प्रथम बार मूल नायक महामस्तिकाभिषेक महोत्सव आयोजित हुआ उसके लिए आचार्य श्री के उपकारों के लिए कोटि-कोटि नमन किया।
इस अवसर पर आचार्य श्री के 41 वें गृह त्याग दिवस पर 41 पुरुषों को जो नियमित अभिषेक करेंगे गुरु आस्था परिवार गायत्री नगर द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गायत्री नगर महारानी फार्म व विभिन्न कालोनियों के लगभग 170 से अधिक भक्तों ने अभिषेक किये।
मन्दिर प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबडा के अनुसार बडी भक्ति के साथ भगवान ऋषभदेव ( आदिनाथ जी) की अष्ट द्रव्यों से पूजा की। संचालन उपाध्यक्ष अरुण शाह द्वारा किया गया। परम पूज्य आचार्य श्री संघ सहित 12 अप्रैल को प्रातः 6 बजे जवाहर नगर की ओर मंगल विहार करेंगे।


